Sep २१, २०२० १८:४६ Asia/Kolkata
  • मेरे मज़हब को मेरा जुर्म बना दिया गया, मुस्लिम विरोधी दिल्ली दंगों में शामिल होने के आरोप में जेल से रिहा होने वाले युवक ने कहा

28 साल के इलियास को दिल्ली पुलिस ने इस साल के शुरू में मुस्लिम विरोधी दंगों के आरोप में गिरफ़्तार करके, दंगों में मुसलमानों के शामिल होने की गवाही देने का दबाव बनाया।

इलियास का कहना है कि पुलिस ने उन्हें हिंसक भीड़ की सीसीटीवी फ़ुटेज दिखाई और आरोप लगाया कि वह भी भीड़ का हिस्सा थे, लेकिन जब उन्होंने घटनास्थल पर होने से इनकार किया, तो पुलिस अधिकारी ने उनसे कहा कि अगर वह 10 लोगों का नाम बता देंगे, तो उन्हें रिहा कर दिया जाएगा।

द वायर से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हिंसक भीड़ में शामिल मैंने कुछ हिंदू लोगों के नाम बताए, तो पुलिस अधिकारी ने कहा कि मुसलमान नाम बता।

इलियास ने पांच महीने से ज़्यादा जेल में बिताए और उनके ख़िलाफ़ कोई सुबूत नहीं होने की वजह से उन्हें ज़मानत दे दी गई है।

उन पर आरोप था कि मुस्लिम विरोधी दंगों के दौरान शिव विहार में राजधानी पब्लिक स्कूल को नष्ट करने में वह भी शामिल थे।

उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि मुस्लिम होने की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

इलियास के ख़िलाफ़ कोई सुबूत नहीं होने होने के बावजूद, उन्हें मंडोली जेल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि मेरे मज़हब को मेरा जुर्म बना दिया गया। msm

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