Sep २७, २०२० १६:५९ Asia/Kolkata
  • ब्रिटिश ईस्ट इंडिया की हिस्ट्री में दिलचस्प मोड़, पूरे भारत की मालिक रह चुकी कंपनी एक भारतीय की संपत्ति बन गई

एक भारतीय उद्योगपति ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के मालिक बन गए हैं। इस कंपनी ने सालों साल तक भारत ही नहीं बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप के एक बड़े भाग को अपने नियंत्रण में रखा। इस कंपनी ने भारत में ब्रिटिश राज का रास्ता साफ़ किया।

अब एक भारतीय ने इस कंपनी को ख़रीद लिया है। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का नाम सबके लिए बहुत जाना पहिचाना है। सन 1600 में इस कंपनी की स्थापना ब्रिटेन के कुछ व्यापारियों ने की। कंपनी शुरू करने के लिए उन्होंने लगभग 70 हज़ार पाउंड की रक़म लगाई। पहले कंपनी का प्रोग्राम मसालों का व्यापार करने का था।

कंपनी ने अपनी पहली फ़ैक्ट्री सूरत में लगाई। 1757 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने मुग़ल स्टेट बंगाल का नियंत्रण बलपूर्वक अपने हाथ में ले लिया और उसके बाद नए नए इलाक़ों को अपने क़ब्ज़े में लेना शुरू कर दिया। 1611 से 1858 के बीच इस कंपनी ने भारत, पाकिस्तान और आधा अफ़ग़ानिस्तान अपने नियंत्रण में रखा। इस कंपनी के पास ढाई लाख से ज़्यादा सैनिक थे। यह कंपनी दुनिया भर में होने वाले व्यापार के 50 प्रतिशत से अधिक भाग पर क़ब्ज़ा जमाए हुए थी यह दुनिया की सबसे ताक़तवर कंपनी थी।

1858 में ब्रिटिश शासन ने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का राज समाप्त कर दिया। 1874 में इस कंपनी को भंग कर दिया गया।

 

2003 में भारतीय व्यापारी संजीव मेहता ने इस कंपनी के 21 प्रतिशत शेयर ख़रीद लिए। इस कंपनी में महिंद्रा और इमाराती बिज़नेसमैन युसुफ़ के भी शेयर थे। 2007 में मेहता ने कंपनी के सारे शेयर ख़रीद लिए और उसके बाद एक बयान जारी किया कि मैं उस कंपनी का मालिक बन गया जो कभी हमारे देश की मालिक थी।  

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