Sep ३०, २०२० १२:३७ Asia/Kolkata
  • बाबरी मस्जिद शहादत केस, सभी आरोपी बरी, मामला आकस्मिक क़रार दिया गया, मुस्लिम पक्ष नाराज़

छह दिसम्बर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद की शहादत के आपराधिक मामले में 28 साल बाद जज सुरेंद्र कुमार यादव की विशेष अदालत ने अपना फ़ैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

जज ने फ़ैसला पढ़ते हुए कहा है कि यह विध्वंस पूर्व नियोजित नहीं था बल्कि आकस्मिक घटना थी। विशेष अदालत ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी व कल्याण सिंह सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया है। 

इस मामले में 49 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। इसमें से 17 की मौत हो चुकी है। सीबीआई व अभियुक्तों के वकीलों ने करीब आठ सौ पन्ने की लिखित बहस दाखिल की है। इससे पहले सीबीआई ने 351 गवाह व करीब 600 से अधिक दस्तावेज़ी साक्ष्य पेश किए थे।

30 सितम्बर, 2019 को सुरेंद्र कुमार यादव ज़िला जज, लखनऊ के पद से सेवानिवृत्त हुए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें फ़ैसला सुनाने तक सेवा विस्तार दिया था। यह फ़ैसला विशेष जज सुरेंद्र कुमार यादव के कार्यकाल का अंतिम फ़ैसला है।

बाबरी मस्जिद शहादत के केस में फ़ैसले के दृष्टिगत सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गये थे।

उधर मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह फ़ैसला क़ानून और हाईकोर्ट दोनों के ख़िलाफ़ है। (AK)

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