Nov २६, २०२० ०९:०५ Asia/Kolkata
  • भारत में निचली ज़ात की महिलाओं को ऊंची ज़ात के मर्द रेप का निशाना बनाते हैं

मनवाधिकार संगठनों का कहना है कि उत्तरी भारत में हिंदुओं की ऊंची ज़ात से संबंध रखने वाले मर्द निचली ज़ात की महिलाओं को रेप का निशाना बनाते हैं और वह आम तौर पर सज़ा से भी बच जाते हैं क्योंकि पीड़ित परिवार दबाव में अकसर केस वापस ले लेते हैं।

रोयटर्ज़ की रिपोर्ट के अनुसार मानवाधिकार के दो संगठनों इकवैलिटी नाउ और स्वाभिमान सोसयटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हरियाणा में दलित महिलाओं और लड़कियों के रेप के 40 मामलों में केवल दस प्रतिशत मामलों में आरोपियों को सज़ा सुनाई गई जबकि यह वह मामले थे जिनमें रेप के बाद महिला को क़त्ल कर दिया गया था या रेप का शिकार बनाई जाने वाली लड़की की उम्र छह साल से कम थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 60 प्रतिशत मामलों में पीड़ितों ने केस वापस ले लिया और अदालत के बाहर समझौता कर लिया। इस प्रकार के फ़ैसले पंचायत सुनाती है जिसके बाद पीड़ित परिवार इंसाफ़ की लड़ाई छोड़ देने पर मजबूर हो जाता है।

स्वाभिमान सोसायटी नामक संगठन का कहना है कि पीड़ितों को धमकाया जाता है और उन पर मुंह बंद रखने के लिए भारी दबाव डाला जाता है, अब अगर कोई पीड़ित इंसाफ़ की लड़ाई नहीं रोकता तो उसकी और उसके परिवार की जान ख़तरे में पड़ जाती है।

हरियाणा पुलिस के डायरेक्टर जनरल मनोज यादव का कहना है कि वह इस रिपोर्ट के बारे में नहीं जानते।

जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि रेप के लगभग 90 प्रतिशत मामलों में यह होता है कि कम से कम एक आरोपी ऊंची ज़ात का होता है जो अन्य साथियों के साथ मिलकर गैंग रेप और कई मामलों में हत्या भी करता है।

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