Dec ०३, २०२० २०:३१ Asia/Kolkata
  • सरकार और किसानों के बीच वार्ता में फिर बात नहीं बनी, नए कृषि क़ानून वापस लेने की मांग पर अड़े किसान

भारत में किसान संगठनों और सरकार के बीच गुरुवार को हुई वार्ता का कोई नतीजा सामने नहीं आया है और पांच दिसम्बर को फिर बात करने पर सहमति बनी है।

भारत की राजधानी दिल्ली में किसान नेताओं और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच गुरुवार को वार्ता हुई जिसका कोई परिणाम नहीं निकल पाया। दोनों पक्ष दो दिन बाद पांच दिसम्बर को फिर से वार्ता करने पर सहमत हुए हैं। कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों के साथ भारत की केंद्र सरकार की चौथे चरण की वार्ता लगभग आठ घंटे बाद ख़त्‍म हो गई। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया है कि बातचीत अच्छे माहौल में हुई और किसानों और सरकार ने अपना-अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि दो-तीन बिंदुओं पर किसानों की चिंता है जिस पर हम खुले मन से बात कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP) के बारे में किसानों की चिंता है लेकिन यह पहले भी जारी था, अब भी जारी है और आगे भी रहेगा। उन्‍होंने कहा कि 5 दिसम्बर को दोनों पक्ष फिर बातचीत करेंगे और उम्‍मीद है कि हम किसी सर्वसम्‍मत समाधान तक पहुंच जाएंगे।

 

इस बीच जहां किसान नेताओं और सरकार के बीच बातचीत जारी है वहीं इसपर सियासत भी तेज़ हो गई है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने किसान आंदोलन के समर्थन में अपना पद्म विभूषण सम्मान लौटा दिया है। देश का दूसरा सर्वोच्च सम्मान लौटाते हुए बादल ने कहा कि भारत सरकार ने किसानों के साथ विश्वासघात किया है। याद रहे कि भारत के किसान, नए कृषि क़ानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। पंजाब समेत देश के कई राज्यों के किसान इस कानून का विरोध कर रहे हैं। किसान नेताओं ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह संसद का एक विशेष सत्र बुलाए और नए कृषि क़ानूनों को ख़त्म करे। (HN)

 

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