Mar ०१, २०२१ १४:०७ Asia/Kolkata
  • सरकार की ख़ामोशी पर किसान नेता हुए सावधान, कहा सरकार आंदोलन के ख़िलाफ़ ...

तीन नए कृषि क़ानूनों को लेकर किसानों के जारी आंदोलन के बीच, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि सरकार की ख़ामोशी बता रही है कि वह किसानों के आंदोलन के ख़िलाफ़ कुछ रूपरेखा तैयार कर रही है।

सरकार और किसान यूनियनों के बीच बातचीत का दौर थम जाने पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि फिर से बातचीत का प्रस्ताव सरकार को ही लाना होगा। उन्होंने रविवार रात को उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जाते वक़्त, बिजनौर के अफ़ज़लगढ़ में पत्रकारों से कहाः “15-20 दिनों से केन्द्र सरकार की ख़ामोशी, इस बात का इशारा है कि कुछ होने वाला है। सरकार आंदोलन के ख़िलाफ़, कुछ क़दम उठाने की रूपरेखा बना रही है।”

राकेश टिकैत ने कहाः “हल निकलने तक किसान वापस नहीं जाएंगे। किसान भी तैयार है, वह खेती भी देखेगा और आंदोलन भी करेगा। सरकार को जब वक़्त हो बात कर ले।”

उन्होंने 24 मार्च तक देश में कई जगह महापंचायत के आयोजन की ख़बर दी। जब उनसे गणतंत्र दिवस पर लाल क़िला परिसर में हुए बवाल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इल्ज़ाम लगाया कि यह सारा बखेड़ा सरकार ने खड़ा किया।

तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों द्वारा जगह-जगह अपनी खड़ी फ़सल नष्ट कर देने संबंधी सवाल पर टिकैत ने कहाः “भारतीय किसान यूनियन तो किसानों को बता रही है कि अभी ऐसा वक़्त नहीं आया है, लेकिन सरकार किसान को ऐसा क़दम उठाने से रोकने के लिए कोई अपील क्यों नहीं कर रही है।”

उन्होंने उत्तर प्रदेश में ज़िला स्तर पर किसान आंदोलन का दायरा बढ़ाने का इशारा देते हुए कहा कि अब गेहूं की फ़सल आने वाली है, अगर किसान का गेहूं एमएसपी पर नहीं ख़रीदा गया तो सरकार ज़िम्मेदार होगी और इसके लिए किसान ज़िलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना देंगे। (MAQ/N)

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