Mar ०३, २०२१ १७:०३ Asia/Kolkata
  • सुप्रीम कोर्ट ने फ़ारुक़ अब्दुल्लाह के ख़िलाफ़ देशद्रोह की याचिका को ख़ारिज करते हुए की अहम टिप्पणी

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 को हटाए जाने का विरोध करने और मोदी सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करने वाले के सासंद और पूर्व पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारुक़ अब्दुल्लाह के ख़िलाफ़ देशद्रोह की याचिका को ख़ारिज कर दिया है।

बुधवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार की राय से अलग राय रखना और असहमति जताना, देशद्रोह नहीं हो सकता।

कोर्ट में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के ख़िलाफ़ देशद्रोह के तहत कार्यवाही करने का आदेश जारी करने के लिए कई याचिकाएं दाख़िल की गई थीं।

याचिका की सुनवाई करते हुए भारत की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति को देशद्रोह नहीं कहा जा सकता है। याचिका को ख़ारिज करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ताओं पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

जस्टिस हेमंत गुप्ता और संजय किशन कौल की बेंच ने कहा कि किसी के असंतोष को देशद्रोह नहीं कह सकते।

याचिका में कहा गया था कि अब्दुल्लाह के ख़िलाफ़ देशद्रोह के तहत कार्यवाही करनी चाहिए और उनके खिलाफ़ न केवल गृह मंत्रालय को क़ानूनी कार्यवाही करनी चाहिए, बल्कि उनकी संसद सदस्यता भी रद्द की जानी चाहिए।

याचिकाकर्ता का दावा था कि फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने लाइव इंटरव्यू के दौरान कहा था कि अनुच्छेद 370 को बहाल करने के लिए वह चीन की मदद लेंगे, जो स्पष्ट रूप से देशद्रोह है। चूंकि अब्दुल्लाह कश्मीर को चीन और पाकिस्तान को सौंपने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए संसद से उनकी सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए और उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।

ग़ौरतलब है कि मोदी सरकार ने धारा 370 हटाने के बाद अब्दुल्लाह समेत कश्मीर के अधिकांश नेताओं को लम्बी मुद्दत के लिए उनके घरों में नज़रबंद कर दिया था या उन्हें जेल भेज दिया था। msm

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