Apr ०८, २०२१ १९:३४ Asia/Kolkata
  • कट्टरपंथी संगठन आरएसएस के लिए अमरीका में बढ़ सकती हैं मुश्किलें, ग़लत तरीक़े से फ़ंड हासिल करने के मामले की हो सकती है जांच

भारत के चरमपंथी संगठन आरएसएस से जुड़े संगठनों के बारे में अमरीका में जांच की मांग तेज़ हो गई है जो कोविड-19 से जुड़ा रिलीफ़ फ़ंड हासिल करके भारत भेज रहे थे।

अलजज़ीरा टीवी चैनल की एक रिपोर्ट से यह मामला चर्चा में आया जिसके बाद अमेरिका में भारतीय कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों के एक बोर्ड ने मांग तेज़ कर दी है कि इस मामले की जांच की जाए। आरएसएस से जुड़े संगठनों ने अमरीका में कोविड19 रिलीफ़ फ़ंड से जुड़ी लाखों डालर की रक़म हासिल कर ली।

कोलीशन टू स्टाप जेनोसाइड इन इंडिया नामक संगठन ने अपने बयान में कहा कि जिन चरमपंथी संगठनों ने यह फ़ंड हासिल किया है वह सब आरएसएस का हिस्सा हैं।

पिछले सप्ताह अलजज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि किस तरह यह संगठन कोविड रिलीफ़ फ़ंड से छोटे कारोबार की मदद के लिए वितरित की जाने वाली रक़म में से लगभग साढ़े आठ लाख डालर हासिल करने में कामयाब हो गए।

बयान में बताया गया है कि विश्व हिंदू परिषद, एकल विद्यालय फ़ाउंडेशन, इनफ़िनिटी फ़ाउंडेशन, सेवा इंटरनैशनल और हिंदु अमेरिकन फ़ाउंडेशन नामक संगठनों ने यह रक़म हासिल की है जो चरमपंथी विचार रखते हैं और भारत में मुसलमानों, दलितों और ईसाइयों सहित अल्पसंख्यकों को कुचलने में व्यस्त हैं।

बयान में कहा गया है कि अमरीकी करदाता का पैसा चरमपंथी संगठनों के नफ़रत के बाज़ार को चमकाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है जो हरगिज़ सहन नहीं किया जा सकता।

चरमपंथी संगठनों का कहना है कि वह सारी रक़म क़ानून के दायरे रह कर हासिल कर रहे हैं।

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