Apr १९, २०२१ २३:०३ Asia/Kolkata
  • भारत को कोरोना की दूसरी लहर नहीं बल्कि सुनामी का सामना है

पिछली सर्दियों में जब विश्व के कई देश कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहे थे, भारत में संक्रमितों की संख्या में तेज़ी से कमी आ रही थी। यहां तक कि कुछ विशेषज्ञों ने तो यह कहना शुरू कर दिया था कि संभवतः भारत में दूसरी लहर नहीं आएगी।

इसके विपरीत, कई विशेषज्ञ दूसरी लहर के कहीं अधिक घातक होने को लेकर लगातार चेतावनी दे रहे थे। यह चेतावनी सच साबित हो रही है। दूसरी लहर पहली लहर से कहीं अधिक घातक है। संक्रमण के आंकड़ों का ग्राफ़ लगातार ऊपर जा रहा है और अभी तक ऐसे कोई संकेत नहीं हैं कि यह अपने चरम पर पहुंच गई है।

कई डॉक्टर कोरोना वायरस की इस दूसरी लहर को सुनामी कह रहे हैं, और इसने भारत की पहले से ही कमज़ोर स्वास्थ्य सुविधाओं को तहस-नहस कर दिया है। अस्पतालों में कोरोना वायरस के मरीज़ों को भर्ती करने के लिए जगह नहीं है। ऑक्सीजन और दवाईयों की शदीद कमी है, शमशान और क़ब्रिस्तान लाशों से पटे पड़े हैं और लोग सड़कों पर दम तोड़ रहे हैं।

इस सबके बीच, देश के प्रधान मंत्री और गृह मंत्री बंगाल फ़तह की मुहिम पर हैं और बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियों को संबोधित कर रहे हैं।

इस भयावह स्थिति के विभिन्न कारण हो सकते हैं, लेकिन सरकार की असंवेदनशीलता ने आग में घी डालने का काम किया है।

पहली लहर के बाद ही देश में इसके ख़ात्मे को लेकर मोदी सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों में इसका श्रेय प्रधान मंत्री को देने की होड़ सी लग गई थी। इस साल मार्च की शुरुआत में स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने एलान किया था कि भारत में कोविड-19 महामारी अब ख़ात्मे की ओर बढ़ रही है।

स्वास्थ्य मंत्री ने इस एलान के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसका श्रेय देते हुए कहा था कि इसने दुनिया के सामने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की एक मिसाल पेश की है। सरकार और मीडिया ने जनवरी से ही वैक्सीन डिप्लोमेसी के तहत दूसरे देशों को वैक्सीन की सप्लाई के क़सीदे पढ़ने शुरू कर दिए थे और विश्व गुरु के रुप में भारत की वैश्विक भूमिका को काल्पनिक आकार देना शुरू कर दिया था।

लेकिन आज जहां कई देशों ने अपनी आबादी के एक बड़े हिस्से को वैक्सीनेट कर दिया है, वहीं भारत की 1 अरब 39 करोड़ की आबादी में से सिर्फ़ 12 करोड़ तक वैक्सीन पहुंच पाई है।

देश और दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन मेकर कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया जून से पहले टीकों की सप्लाई बढ़ाने में कामयाब नहीं हो सकेगी, क्योंकि इसके पास प्रोडक्शन तेज़ करने के लिए पैसा नहीं है।   

दिल्ली और महराष्ट्र समेत वायरस से अत्यधिक प्रभावित राज्यों ने लॉकडाउन सहित कुछ प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन अगर वैक्सीन उत्पादन और आयात में काफ़ी तेज़ी भी आएगी, तब भी नए मामलों की संख्या एक महीने तक लगातार बढ़ती जाएगी। बल्कि कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सिलसिला महीनों तक जारी रह सकता है।

वाशिंगटन डीसी में सेंटर फॉर डिज़ीज़ डायनेमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी के संस्थापक और निदेशक डॉ. रामनयन लक्ष्मीनारायण ने सीबीएस न्यूज़ से बात करते हुए कहा है कि मौजूदा लहर वास्तव में कितनी दूर तक जाती है, यह सामूहिक समारोहों के प्रतिबंधों पर निर्भर है। तब तक हम कठिन दौर में हैं और यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि मौजूदा स्थिति कब तक जारी रहेगी। msm

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