May ०७, २०२१ १३:२८ Asia/Kolkata
  • पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव के नतीजा का किसान आंदोलन पर असर

जैसे ही नतीजे का एलान हुआ उन्होंने पूरे हरियाणा में धरना स्थलों पर भाजपा की हार में ख़ुशियां मनायी और इस हार को केसरिया पार्टी के लिए उलटी गिनती कहा।

केन्द्र सरकार के विवादित कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव और यूपी पंचायत चुनाव के नतीजे ने उनके आंदोलन को ऊर्जा दी है। द इंडियन एक्सप्रेस बता रहा है कि क्यों यह भावना किसानों के बीच मज़बूत हो रही है और इसका भाजपा के लिए क्या नतीजा निकलेगा।

चुनाव के दौरान किसान नेता ख़ास तौर पर पश्चिम बंगाल गए ताकि भाजपा के ख़िलाफ़ प्रचार करें। जैसे ही नतीजे का एलान हुआ उन्होंने पूरे हरियाणा में धरना स्थलों पर भाजपा की हार में ख़ुशियां मनायी और इस हार को केसरिया पार्टी के लिए उलटी गिनती कहा। अब किसानों में यह भावना मज़बूत हो रही है कि वे बंगाल के अनुभव के बाद, दूसरे राज्यों में भी भाजपा के ख़िलाफ़ अहम रोल अदा कर सकते हैं। किसान यूपी पंचायत चुनाव में भाजपा को हुए नुक़सान से बहुत ख़ुश हैं, क्योंकि पश्चिमी यूपी के किसानों ने आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया है। अब हरियाणा के किसानों ने यह एलान करना शुरू कर दिया है कि वे यूपी विधान सभा चुनाव में भाजपा के ख़िलाफ़ सक्रिय रूप से प्रचार करेंगे।

दूर-दराज़ इलाक़ों के चुनावी नतीजा का आंदोलन पर कैसे असर पड़ेगाॽ

किसानों का मानना है कि उनके आंदोलन का नतीजा, देश में भाजपा की राजनैतिक ताक़त से जुड़ा हुआ है। तभी सत्ताधारी पार्टी तीनों कृषि क़ानून के भविष्य के बारे में फ़ैसला करेगी। इसी वजह से किसान चुनावों के नतीजों को अपने आंदोलन के भविष्य से जोड़ कर देख रहे हैं।

राजनैतिक टीकाकार ऋषि सैनी का कहना है कि प्रदर्शन कर रहे किसान भविष्य में चुनावी परिदृष्य को बदलने की कोशिश करेंगे अगर प्रदर्शन लंगे वक़्त तक जारी रहा। पश्चिम बंगाल के नतीजे का हवाला देते हुए सैनी का कहना थाः “इसका किसान आंदोलन सहित सभी आंदोलनों पर सार्थक असर पड़ेगा जो भापजा की अगुवाई वाली सरकार के ख़िलाफ़ चल रहे हैं।”

भाजपा यह इल्ज़ाम लगा रही है कि विपक्षी पार्टियां राजनैतिक हित के लिए किसान आंदोलन का समर्थन कर रही हैं।

हरियाणा में क्या हालात होंगेॽ

पश्चिम बंगाल विधान सभा और यूपी पंचायत चुनाव के नतीजे हरियाणा में किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जिस दिन पश्चिम बंगाल के विधान सभा चुनाव के नतीजे का एलान हुआ उसी दिन हरियाणा के भिवानी ज़िले में क़रीब दो दर्जन किसानों को उस वक़्त हिरासत में लिया गया, जब वे मुख्य मंत्री के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने के लिए भिवानी जा रहे थे। जैसे ही उन्हें हिरासत में लिया गया, किसानों ने उनकी रिहाई की मांग करते हुए चार अहम सड़कों को बंद कर दिया, जिसके नतीजे में भिवानी के आंदोलनकर्ता छोड़ दिए गए। भारतीय किसान यूनियन के कुरुक्षेत्र ज़िले के किसान अध्यक्ष जस्बीर सिंह ममुमज्रा का कहना है कि आंदोलनकर्ताओं के लिए गेहूं का दान बढ़ गया है क्योंकि पश्चिम बंगाल विधान सभा और यूपी पंचायत के नतीजों ने पाँच महीने के आंदोलन में नई जान डाल दी है।

भाजपा नेताओं का क्या कहना हैॽ

भाजपा में एक वर्ग किसान आंदोलन से चिंतित है क्योंकि भारत की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा किसानों पर आधारित है, लेकिन उन्हें लगता है कि प्रदर्शन ज़्यादा लंबा नहीं खिंचेगा।

(साभारःद इंडियन एक्सप्रेस)

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