Jun २३, २०२१ १८:२० Asia/Kolkata
  • ईरान के बारे में अब पहले से कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकेगा, इस्राईल

इस्राईली विशेषज्ञों के अनुसार परमाणु समझौते के पुनर्जीवित करने से संबन्धित वार्ता के बारे में अब के बाद से तलेअवीव को अब समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

हआरेत्स समाचारपत्र के अनुसार इब्राहीम रईसी के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद विश्व शक्तियों के साथ ईरान की वार्ता का रुख़ कैसा होगा इसको लेकर इस्राईल को परेशानियों का सामना करना होगा।

जेनेटन लाइस ने अपने लेख में लिखा है कि ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर अन्तराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी के निरीक्षण का समझौता कल से समाप्त हो रहा है।  उन्होंने कहा कि इस वास्तविकता के दृष्टिगत इस्राईल की गुप्तचर सेवा ने परमाणु वार्ता के बारे में तीन विकल्प बना रखे हैं।

पहले विकल्प के अनुसार ईरान परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहता है लेकिन उसे इसका इंतेज़ार है कि इब्राहीम रईसी अपना पदभार संभाल लें उसके बाद यह काम किया जाए।

दूसरा विकल्प पहले विकल्प से कुछ विरोधाभास रखता है।  इसके साथ विश्व शक्तियों के साथ ईरान की वार्ता विफलता की ओर बढ़ रही है।  परमाणु वार्ता के बारे में ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रति के सख़्त दृष्टिकोण के कारण समझौते पर सहमति संभव नहीं है।

तीसरा विकल्प यह है जिसकी पुष्टि कुछ अन्तर्राष्ट्रीय हस्तियों ने भी की है, ईरान बड़ी शक्तियों के साथ वार्ता की गति को कम कर देगा ताकि परमाणु क्षेत्र में प्रगति को हासिल कर सके और इस उपलब्धि को जीत के कार्ड के रूप में वार्ता में प्रयोग करे।

हआरेत्स के इस लेख में आया है कि इस्राईल अब भी ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर अन्तर्राष्ट्रीय निगरानी के संबन्ध में बड़ी शक्तियों के साथ ईरान के व्यवहार पर नज़र रखे हुए है।  

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