Jun २३, २०२१ २०:१२ Asia/Kolkata
  • रईसी के सत्ता में आ जाने के बाद परमाणु समझौता आसान हो गया या असंभव?

ब्रिटेन के अख़बार गार्डियन ने सैयद इब्राहीम रईसी के ईरान के राष्ट्रपति चुने जाने के बारे में एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें इस बात का जायज़ा लिया गया है कि सत्ता में आने वाली इस तब्दीली के बाद ईरान के साथ परमाणु समझौता आसान हो गया है या असंभव?

अख़बार लिखता है कि सैयद इब्राहीम रईसी को सुरक्षा संस्थाओं का पूरा विश्वास हासिल है और वह सुप्रीम लीडर के बेहद क़रीबी माने जाते हैं।

ईरानी नेतृत्व इस नतीजे पर पहुंच चुका है कि प्रतिबंधों की मार झेल रही अर्थ व्यवस्था को आंतरिक संसाधनों और स्तंभों पर इस मज़बूती से खड़ा करना होगा कि वह आगे बढ़ने लगे और इसके लिए व्यापक रोडमैप पर काम करना ही एक मात्र विकल्प है। अब अमरीका और यूरोप को यह फ़ैसला करना है कि परमाणु समझौते से अमरीका के निकल जाने के बाद ईरान ने जो महारत और जो अनुभव हासिल कर लिए हैं उनके बारे में क्या किया जा सकता है क्योंकि ट्रम्प ने जो क़दम उठाया उसके बाद ईरानियों का अमरीकी वादों पर कोई भरोसा नहीं रह गया है।

आशवादी विचार के लोग तो यह कह रहे हैं कि अब ईरानी नेतृत्व भरपूर आंतरिक समन्वय के साथ समझौते को लागू करेगा लेकिन कुछ अन्य लोगों का विचार है कि अब परमाणु समझौते का लागू हो पाना कठिन हो जाएगा।

हसन रूहानी के विपरीत सैयद इब्राहीम रईसी यह सोच नहीं रखते कि हर हाल में विदेशी निवेश आए तभी ईरान की अर्थ व्यवस्था आगे बढ़ेगी मगर यह संभव है कि वह आर्थिक समस्याओं को कम करने के लिए कुछ समझौते कर लें।

अगर अमरीका ने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों में कुछ कमी कर दी तो ब्रिटेन के लिए रास्ता खुल जाएगा कि वह ईरान से बातचीत को आगे बढ़ाए, दोहरी नागरिकता वाले कुछ क़ैदियों की रिहाई के बारे में बात करे, शाह के ज़माने में किए गए समझौते के आधार पर ब्रिटेन पर ईरान का जो क़र्ज़ा है उसे ईरान को लौटाए और ईरान के लिए दवाओं की सप्लाई शुरु करे।

स्रोतः बीबीसी

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