Jul २८, २०२१ १५:३५ Asia/Kolkata
  • पश्चिम पर भरोसे का कोई फ़ायदा नहीं

ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने राष्ट्रपति और सरकारी प्रतिनिधिमंडल से भेंट में बल देकर कहा है कि आंतरिक कार्यक्रम में पूरी तरह पश्चिम पर भरोसा व विश्वास नहीं करना चाहिये।

इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने बल देकर कहा है कि इस सरकार में यह बात ज्ञात हो गयी कि पश्चिम पर भरोसे का कोई फायदा नहीं है और पश्चिमी, हमारी सहायता नहीं करेंगे और जहां भी संभव होगा वे हमें आघात पहुंचायेंगे और जहां वे आघात नहीं पहुंचा रहे हैं वहां आघात पहुंचाना संभव नहीं है और जहां भी संभव होगा वे आघात पहुंचायेंगे और यह बहुत महत्वपूर्ण अनुभव है।

उन्होंने बल देकर कहा कि आंतरिक कार्यक्रमों में पूरी तरह पश्चिम पर भरोसा नहीं करना चाहिये क्योंकि निश्चितरूप से वह कार्यक्रम विफल हो जायेगा और निश्चितरूप से उसे आघात पहुंचेगा। इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आपने जहां भी अपने कार्यों में पश्चिम पर भरोसा किया वहां विफल रहे और जहां भी पश्चिम पर भरोसा किये बिना प्रयास किया वहां सफल व कामयाब रहे।

इसी प्रकार उन्होंने कहा कि जहां भी आपने विषयों को पश्चिम के साथ समझौते, पश्चिम और अमेरिका के साथ वार्ता के भरोसे पर छोड़ा वहां रह गये, वहां आप आगे नहीं बढ़ पाये क्योंकि वे सहायता नहीं करते।

ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने ईदे ग़दीर की समस्त मुसलमानों विशेषकर ईरानी राष्ट्र को बधाई दी और जनता की सेवा को ईश्वर की नेअमत बताया और कहा कि इस नेअमत का शुक्र अदा करने के लिए इस्लामी क्रांति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए समस्त संभावनाओं से लाभ उठाया जाना चाहिये।

उन्होंने सरकार के क्रिया- कलापों का आंकलन करते हुए कहा कि श्री रूहानी की सरकार के क्रियाकलाप विभिन्न क्षेत्रों में एक जैसे नहीं थे कुछ क्षेत्रों में यह क्रियाकलाप अपेक्षाओं के अनुसार थे तो कुछ में इस प्रकार नहीं थे।

ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने अभी हाल ही में होने वाली वियना वार्ताओं की ओर भी संकेत किया और वार्ताकार कूटनयिकों के प्रयासों पर प्रसन्नता जताई और कहा कि अमेरिकी इन वार्ताओं में अपने शत्रुतापूर्ण दृष्टिकोणों पर मज़बूती के साथ आग्रह करते रहे और एक कदम भी आगे नहीं बढ़े, अमेरिकी ज़बान से कहते हैं कि प्रतिबंध खत्म कर देंगे परंतु उन्होंने प्रतिबंधों को खत्म नहीं किया और न करेंगे और साथ ही वे इसके लिए शर्त भी रखते और कहते हैं कि इसी समझौते में ऐसे वाक्य को शामिल किया जाना चाहिये कि बाद में कुछ विषयों के बारे में वार्ता की जायेगी अगर से शर्त को स्वीकार नहीं करते हैं तो हम कोई समझौता नहीं करेंगे।

ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने कहा कि अमेरिकी इस वाक्य की वृद्धि करके परमाणु, मिसाइल और क्षेत्र के दूसरे मामलों के बारे में हस्तक्षेप का मार्ग प्रशस्त करना चाहते हैं और अगर ईरान उसके बारे में वार्ता करने के लिए तैयार नहीं होता है तो कहते हैं कि उसने परमाणु समझौते का उल्लंघन किया है और हम कोई समझौता नहीं करेंगे। सुप्रीम लीडर ने कहा कि अमेरिकी अनैतिक व्यवहार करते हैं और अमेरिकी अपने वचनों को तोड़ने में संकोच से काम नहीं लेते हैं जैसाकि उन्होंने एक बार इस समझौते का उल्लंघन किया और अब अमेरिकी ईरान से यह कह रहे हैं कि इस बात की गैरेंन्टी दो कि भविष्य में दोबारा परमाणु समझौते का उल्लंघन नहीं करोगे। MM

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