Sep ०५, २०२१ १६:२४ Asia/Kolkata

ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने अपने पहले टीवी इंटरव्यू में अर्थव्यवस्था और कोरोना टीकाकरण में तेज़ी जैसे विषयों पर बात की।

ईरानी राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों की सुरक्षा को ईरान की सुरक्षा बताते हुए कहाः अफ़ग़ानिस्तान संकट का समाधान जनता के वोट से सरकार का गठन और देश में जन प्रशासन है।

परमाणु समझौते के बारे में राष्ट्रपति रईसी का कहना था कि ईरान पर दबाव का कभी कोई नतीजा नहीं निकला है और पश्चिम यह बात कई बार अज़मा चुका है, इसलिए दबाव और धमकी के साथ बातचीत स्वीकार्य नहीं है।

ईरान के राष्ट्रपति का कहना था कि वार्ता एक कूटनीतिक रास्ता है, लेकिन अमरीका और पश्चिम दबाव के साथ वार्ता करना चाहते हैं, जबकि ईरान वार्ता के ज़रिए अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करना चाहता है और प्रतिबंधों को पूर्ण रूप से समाप्त करना चाहता है और वह अपने इस उद्देश्य से एक क़दम भी पीछे नहीं हटेगा।

परमाणु समझौता एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित करके अनुमोदन किया है। इसीलिए ईरानी राष्ट्रपति ने परमाणु समझौते के बारे में अपनी सरकार का रुख़ पूर्ण रूप से स्पष्ट कर दिया है, जो अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के अनुरूप है।

अमरीकी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल ने राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन की जीत के बाद एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें आशा जताई थी कि 20 जनवरी 2021 के बाद ईरान को लेकर व्हाइट हाउस की नीति वास्तविक कूटनीति के आधार पर होनी चाहिए न कि ईरान को पूरी तरह से झुकाने की इच्छा पर। लेकिन अमरीका आज भी 2231 प्रस्ताव का उल्लंघन कर रहा है और परमाणु समझौते को लेकर जो नीति ट्रम्प ने अपना रखी थी, उसे ही आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस संदर्भ में यूरोपीय देशों की नीति भी कुछ सही नहीं रही है। हालांकि इन देशों ने परमाणु समझौते से बाहर निकलने के लिए अमरीका की आलोचना की थी और अपनी प्रतिबद्धताओं पर अमल करने की बात कही थी, लेकिन अभी तक उन्होंने अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया है, बल्कि अब अमरीका की हां में हां मिला रहे हैं, जबकि वे जानते हैं कि ईरान विरोधी अमरीका के एकपक्षीय प्रतिबंध ग़ैर क़ानूनी हैं। msm