Sep २२, २०२१ ०९:१३ Asia/Kolkata
  • अगर ईरान सीरियाई और इराक़ी राष्ट्रों के साथ न होता तो आज दाइश यूरोप का पड़ोसी होताः राष्ट्रपति रईसी

राष्ट्रपति ने बल देकर कहा है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान की नीति क्षेत्र के समस्त देशों की संप्रभुता की सुरक्षा है।

राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने कहा कि जो चीज़ सबसे अधिक विश्व की शांति व सुरक्षा को ख़तरे में डाल रही है वह राष्ट्रों के अधिकारों का हनन है। आयतुल्लाह रईसी ने कल वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से राष्ट्रसंघ की महासभा के 76वें वार्षिक अधिवेशन में भाषण देते हुए बल देकर कहा अमेरिकी लोगों द्वारा इस देश की कांग्रेस की इमारात पर हमला करने और अमेरिकी विमानों से अफगानी लोगों को फेंके जाने की तस्वीरों के प्रकाशित होने से विश्व में यह संदेश गया है कि अमेरिकी व्यवस्था का कोई महत्व नहीं है चाहे वह देश के अंदर हो या देश के बाहर।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रों का प्रतिरोध बड़ी शक्तियों की शक्ति से अधिक शक्तिशाली है और आज पश्चिम की पहचान दूसरों पर थोपने की योजना विफल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में अमेरिका की ग़लती यह रही है कि दुनिया के लोगों के साथ अपनी जीवन शैली परिवर्तित करने के बजाये वह दुनिया के साथ अपनी युद्ध की शैली बदलता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि ईरानी राष्ट्र का प्रतिबंध न परमाणु कार्यक्रम के समय से और न ही इस्लामी क्रांति के समय से आरंभ हुआ है बल्कि यह प्रतिबंध वर्ष 1951 से ईरानी तेल के राष्ट्रीयकरण के समय से आरंभ हुआ है और उस समय अमेरिका और ब्रिटेन ने ईरान की निर्वाचित सरकार के खिलाफ सैन्य विद्रोह किया था। उन्होंने कहा कि आज विशेषकर कोरोना के दौर में इस महामारी से मुकाबला करने वाली दवाओं पर भी प्रतिबंध है और यह प्रतिबंध मानवता विरोधी अपराध है।

राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान का सुझाव व प्रस्ताव है कि सलामती और पर्यावरण को मानवीय विषय घोषित किया जाये और साथ ही इनके ख़िलाफ हर प्रकार के प्रतिबंध को निषेध घोषित किया जाये। राष्ट्रपति ने कहा कि मैं ईरानी राष्ट्र और ईरान में शरण लेने वाले लाखों शरणार्थियों की ओर से मानवता प्रेमी वस्तुओं के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध की भर्त्सना करता हूं और आह्वान करता हूं कि मानवता के खिलाफ इस संगठित अपराध को अमेरिकी मानवाधिकार के प्रतीक के रूप में पंजीकृत किया जाये।

राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने कहा कि ईरान की नीति क्षेत्र के समस्त देशों की स्थिरता और संप्रभुता की सुरक्षा है और अगर ईरानी राष्ट्र की शक्ति और भूमिका सीरियाई और इराकी राष्ट्रों के साथ न होती और शहीद अबू मेहदी अलमोहन्दिस और शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी के प्रयास न होते तो दाइश आज यूरोप का पड़ोसी होता। MM

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