Sep २८, २०२१ ११:५५ Asia/Kolkata
  • राष्ट्र संघ के पटल पर क्यों बढ़ती जा रही हैं ईरान पर हमले की इस्राईली धमकियां? क्या ईरान परमाणु बम बना चुका है? अब्दुल बारी अतवान का जायज़ा

लगता है कि अमरीका की अब यह उम्मीद मर चुकी है कि ईरान वियेना में परमाणु वार्ता की मेज़ पर लौटेगा। इसीलिए उसने आईएईए के ज़रिए और इस्राईली धमकियों के रूप में ईरान पर दबाव बढ़ा दिया है।

अमरीका ने सोमवार को यह संकेत किया कि अगर ईरान ने तेहरान के उत्तर में करज के इलाक़े में बने सेंट्रीफ़्यूज मशीनों के प्रतिष्ठान की निगरानी के लिए आईएईए को अनुमति न दी तो वह ईरान को कूटनैतिक सज़ा दे सकता है। आईएईए में ईरान के राजदूत काज़िम ग़रीबाबादी ने जवाब दिया कि आईएईए के साथ हुए समझौते में यह प्रतिष्ठान शामिल नहीं है इसलिए ईरान इस प्रतिष्ठान के भीतर की गतिविधियों की वीडियो नहीं देगा। उन्होंने कहा कि अगर इसकी वीडियो चाहिए तो ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं और ईरान के परमाणु प्रतिष्ठान पर हुए इस्राईल के आतंकी हमले की निंदा की जाए।

वैसे तो इस्राईल पहले भी ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले की धमकियां देता रहा है लेकिन जिसने भी राष्ट्र संघ महासभा में इस्राईली प्रधानमंत्री नफ़ताली बेनेत का भाषण देखा वह आसानी से अंदाज़ा लगा सकता है कि इस्राईल में असाधारण बेचैनी और चिंता फैल गई है इसीलिए इस्राईली धमकियों का अंदाज़ बिल्कुल बदल गया है।

बेनेत का यह हाल रहा कि उन्होंने इस्राईल फ़िलिस्तीन विवाद की बात ही नहीं की, बार बार ईरान का नाम लेकर सीना पीटते रहे।

इस्राईल पर छाए इस जुनून की दो वजहें हैं,

पहली वजह यह है कि अब अमरीकियों और इस्राईलियों को यक़ीन हो चुका है कि ईरान अगर चाहे तो वह परमाणु हथियार बना सकता है उसके पास इसकी तकनीक और क्षमता मौजूद है।

दूसरी वजह यह है कि ईरान की रईसी सरकार वियेना परमाणु वार्ता को ज़्यादा महत्व नहीं दे रही है। ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान कह चुके हैं कि ईरान को किसी तरह की जल्दी नहीं है, वियेना वार्ता में लौटने के लिए ईरान को तीन महीने का समय चाहिए।

इस्राईल की बेचैनी की वजह शायद अमरीकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन का वह बयान है जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान तीन महीने के भीतर परमाणु बम बना सकता है अतः परमाणु समझौते के बारे में वार्ता की बहाली ज़रूरी है।

इस्राईल दरअस्ल ईरान के बारे में अपनी मूर्खतापूर्ण नीतियों का अब ख़मियाज़ा भुगत रहा है। वह ईरानियों को  सीधा साधा समझने की ग़लती कर बैठा। हमारी इस बात की पुष्टि इससे होती है कि पूर्व इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू ने पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प को परमाणु समझौते से बाहर निकलने पर तैयार किया था। जबकि उन्हें पता ही नहीं था कि वह ईरान को अनजाने में बहुत बड़ा फ़ायदा पहुंचा रहे हैं। क्योंकि इस तरह ईरान को भी परमाणु समझौते का पालन छोड़ने का मौक़ा मिल गया।

इस्राईल की धमकियों से ईरान डरने वाला नहीं है बल्कि इसका उल्टा ही नतीजा निकलेगा। ईरान क्षेत्रीय ताक़त बन चुका है। ईरान प्रतिबंधों का सामना करते करते सभी ज़रूरी क्षेत्रों में आत्म निर्भर बन चुका है।

हमारी कभी ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह ख़ामेनई और राष्ट्रपति रईसी से मुलाक़ात तो नहीं हुई लेकिन हम इतना जानते हैं कि राष्ट्र संघ महासभा में इस्राईली प्रधानमंत्री की धमकियां सुनकर वह मुस्कुरा रहे होंगे। वैसे शायद उनके पास बेनेत का भाषण सुनने का समय ही न हो और न ही उन्हें इसमें कोई दिलचस्पी हो क्योंकि इस्राईली प्रधानमंत्री के इस भाषण की कोई हैसियत नहीं है, उनकी सारी बातें बेबुनियाद हैं।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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