Oct १६, २०२१ १९:४७ Asia/Kolkata

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमख़ानी ने आज़रबाइजान के राष्ट्रपति के भ्रामक और बेबुनियाद दावों का जवाब देते हुए ट्वीट किया कि शैतान के जाल से होशियार रहिए जिसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ती है।

आज़रबाइजान के राष्ट्रपति इलहाम अली ओफ़ ने हाल ही में एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन में बेतुका बयान दिया। उन्होंने दावा कर दिया कि इस्लामी गणतंत्र ईरान आर्मीनिया के साथ मिलकर उन इलाक़ों के रास्ते जिन पर पहले आर्मीनिया का अवैध क़ब्ज़ा था मादक पदार्थों की तस्करी कर रहा है और काम पिछले तीस साल से जारी है।

अली शमख़ानी ने आज़रबाइजान के राष्ट्रपति का ध्यान इस हक़ीक़त की ओर केन्द्रित करवाया कि ईरान वह देश है जिसे सारी दुनिया मादक पदार्थों की लड़ाई के चैंपियन के रूप में जानती है, एसे देश पर इस तरह के बेतुके इलज़ाम लगाने का यही नतीजा निकलेगा कि इलज़ाम लगाने वाला की विश्वस्नीयता पर सवालिया निशान लग जाएगा।

ईरान मादक पदार्थों से संघर्ष में अब तक हज़ारों शहीदों की क़ुरबानी पेश कर चुका है और यह इस मार्ग में ईरान के सराहनीय और कठिन संघर्ष का केवल एक भाग है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद ख़तीबज़ादे ने भी मादक पदार्थों से संघर्ष में ईरान के मूल्यवान योगदान की अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की ओर से बार बार की गई सराहना का उल्लेख करते हुए कहा कि बाकू ने वैसे तो बड़े दोस्ताना संदेश भेजे लेकिन इसके बावजूद आज़रबाइजान के राष्ट्रपति ने प्रचारिक स्टंट जैसा बयान दिया है जिसका उचित समय पर उचित जवाब दिया जाएगा।

आज़रबाइन के राष्ट्रपति के ईरान विरोधी बयान के बारे में दो विचार पाए जाते हैं। एक तो यह कि कुछ ख़ास गलियारों की ओर से बनाए गए माहौल से प्रभावित होकर उन्होंने इस तरह का बेबुनियाद और भड़काऊ बयान दिया है जिसका दोनों देशों के संबंधों पर असर ज़रूर पड़ेगा। यह बयान ख़ास तौर पर ईरान आज़रबाइजान संबंधों को निशाने पर रख कर दिया गया है।

दूसरा विचार यह है कि यह सब सोची समझी योजना का हिस्सा है और यह साज़िश ख़ास राजनैतिक लक्ष्यों के तहत रची गई है और इसी के अंतर्गत इस्राईल की गतिविधियां भी इस इलाक़े में बढ़ गई हैं।

बहरहाल इन गतिविधियों का क्या लक्ष्य है यह बात ईरान की निगाह से छिपी नहीं है लेकिन जैसा कि सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिष

द के सचिव अली शमख़ानी ने कहा कि अच्छे पड़ोस के उसूलों को नज़रअंदाज़ करना और झूठे और ग़ैर सार्थक बयान देना सदभावना और समझदारी नहीं है।

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