Oct २४, २०२१ १६:३६ Asia/Kolkata
  • नई इस्लामी सभ्यता का निर्माण, सुन्नी और शिया मुसलमानों के बीच एकता के बिना असंभवः वरिष्ठ नेता

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने फ़िलिस्तीन के मुद्दे को एकता का मुख्य मानदंड बताया है।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने एकता कांफ्रेंस में भाग लेने वालों और देश के अधिकारियों के साथ भेंट में फ़िलिस्तीन को एकता का मानदंड बताया है।  आपने कहा कि वे सरकारें जिन्होंने ज़ायोनी शासन के साथ संबन्ध सामान्य किये हैं उनको इसका हर्जाना देना चाहिए।

पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम और इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म दिवस के अवसर पर इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने रविवार को तेहरान में एकता कांफ्रेंस में भाग लेने वाल मेहमानों से भेंट में दो महत्वपूर्ण कर्तव्यों को याद दिलाया।  उन्होंने कहा कि पहला कर्तव्य, मानव जीवन के सभी आयामों में इस्लाम की व्यापकता का प्रचार और दूसरा, मुसलमानों के बीच एकता को मज़बूत बनाना।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि नई इस्लामी सभ्यता का निर्माण, सुन्नी और शिया मुसलमानों के बीच एकता के बिना संभव ही नहीं है।  उन्होंने कहा कि मुसलमानों के बीच एकता का मुख्य मुद्दा फ़िलिस्तीन है।  इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि फ़िलिस्तीनियों को उनके अधिकारों को दिलवाने के लिए जितनी भी गंभीरता से काम किया जाएगा उसी अनुपात में इस्लामी एकता में मज़बूती पैदा होगी।

उन्होंने कुछ क्षेत्रीय सरकारों द्वारा अवैध ज़ायोनी शासन के साथ संबन्धों को सामान्य बनाने के कार्य को पाप और बहुत बड़ी ग़लती बताया।  वरिष्ठ नेता के अनुसार इन सरकारों को इस्लामी एकता विरोधी इस कार्य को रोकना चाहिए और इसका मुआवज़ा अदा करना चाहिए। 

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने मुसलमानों के बीच एकता को क़ुरआन का आदेश बताते हुए कहा कि इस्लामी एकता का मुद्दा एक सैदांतिक मुद्दा है रणनीतिक नहीं।  एकता, मुसलमानों को सशक्त बनाने का काम करेगी और ग़ैर मुस्लिम सरकारों के साथ संपर्क में हम पूरी शक्ति के साथ बात करें।

सर्वोच्च नेता ने कहा कि बार-बार एकता के विषय पर बल दिये जाने का कारण यह है कि इस्लामी पंथों के बीच दूरियां पाई जाती है जबकि दुश्मन इन दूरियों को अधिक से अधिक बढ़ाने के लिए लागतार कोशिशें कर रहे हैं।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वर्तमान समय में अमरीकी राजनीति में शिया औरी सुन्नी का नाम बहुत प्रयोग हो रहा है जबकि वे मूल रूप से इस्लाम के ही विरोधी हैं।

सर्वोच्च नेता ने अमरीका और उसके तत्वों द्वारा इस्लामी जगत में मतभेद फैलाने की चालों की ओर संकेत करते हुए कहा कि हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान की मस्जिदों में नमाज़ियों के बीच होने वाले विस्फोट, इस्लामी दुश्मनों की इन्ही चालों का उदाहरण हैं।  हालांकि इन विस्फोटों को दाइश ने अंजाम दिया किंतु अमरीकी पहले ही स्वीकार कर चुके हैं कि दाइश को उन्होंने ही जन्म दिया है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने एकता के विषय पर होने वाले वार्षिक सम्मेलनों को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि इस बारे में लगातार विचार-विमर्श, चर्चाओं के साथ ही योजनाबंदी करके स्थाई तौर पर काम किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उदाहरण स्वरूप अफ़ग़ानिस्तान के मामले में, घटने वाली घटनाओं को रोकने के लिए देश के अधिकारियों की केन्द्रों और मस्जिदों में उपस्थिति तथा कार्यक्रमों में सुन्नी भाइयों को भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

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