Jan १४, २०२२ १२:०३ Asia/Kolkata
  • ईरान के बहादुर सैनिकों ने अमेरिकी सैनिकों के घमंड की निकाली हवा, अमेरिकी सैनिक सिसक- सिसक कर रोया

प्रिय पाठको क्या आप लोगों को पता है कि 22 दैय 1394 हिजरी शमसी अर्थात 12 जनवरी वर्ष 2016 को क्या हुआ था? यह वह दिन जब ईरान के बहादुर सैनिकों ने फार्स की खाड़ी में 10 अमेरिकी सैनिकों को गिरफ्तार करके उनका आतिथ्य सत्कार भी किया था। अमेरिकी सैनिकों को क्यों और कैसे गिरफ्तार किया?

12 जनवरी 2016 को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा अपनी सेना की बड़ी प्रशंसा कर रहे थे और कह रहे थे कि हमारे पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है या यूं कहूं कि जिस दिन वह डींग मार रहे थे उसी दिन फार्स की खाड़ी में ईरान के बहादुर सैनिकों ने अमेरिका के 10 नौसैनिकों को धरदबोचा।

मज़े की बात है कि गिरफ्तार अमेरिकी सैनिक कह रहे थे कि वे कुवैत जा रहे थे रास्ता भटक कर ईरान की जलसीमा में आ गये।

यहां इस बात का उल्लेख ज़रूरी है और वह यह है कि जब ईरान के शूरवीर जवानों ने अमेरिकी सैनिकों को घेर लिया तो वहीं कुछ किलोमीटर की दूरी पर मौजूद दूसरे अमेरिकी सैनिक उनकी सहायता के लिए आ गये और कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है अतः यहां उन्हें गिरफ्तार करना बिल्कुल सही नहीं है परंतु ईरानी सैनिकों की तरफ से जवाब दिया गया कि यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र नहीं बल्कि ईरानी जलक्षेत्र है और ईरानी जलसीमा में प्रवेश करने वालों के साथ कानून के मुताबिक व्यवहार किया जायेगा।

अमेरिकी सैनिक किसी भी हालत में राज़ी नहीं थे कि उनके साथियों को गिरफ्तार किया जाये इसलिए उन्होंने 20 मील की  दूरी पर मौजूद अमेरिकी युद्धपोत से सहायता मांगी और तो कई हेलीकाप्टर अपने साथियों को बचाने के लिए आ गये और ईरान की तीव्र गति से चलने वाली नौकाओं के मात्र 300 मीटर की दूरी पर आकर रुक गये और अमेरिकी सैनिकों को छोड़ने की मांग करने लगे परंतु शेरे खुदा के शेरों ने उनकी अतार्किक मांगों को स्वीकार नहीं किया तो अमेरिकी सैनिकों ने बल प्रयोग की धमकी दी तो ला फता इल्ला अली के शेरों ने कहा कि तुम और तुम्हारे युद्धपोत सब हमारी मिसाइलों के निशाने पर हैं और हम जवाब के लिए पूरी तरह तैयार हैं।  जब अमेरिकी सैनिकों ने अपनी आंखों से देख लिया कि ईरानी सैनिकों से टकराने का मतलब अपनी मौत को दावत देना है तो वे पीछे हट गये।

 

पूरी दुनिया विशेषकर अमेरिकियों ने जब यह दृश्य टीवी पर देखा तो उनकी क्या हाल हुई होगी यह उनका दिल ही जानता होगा। अमेरिका ने ईरान से आधिकारिक तौर क्षमा मांगी तब ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को रिहा किया। गिरफ्तार अमेरिकी सैनिकों में से एक सिसक- सिसक कर रो रहा था। उसके इस अमल से अमेरिकी सैनिकों की बहादुरी का अंदाजा लगाया जा सकता है। जब अमेरिकी सैनिक की यह हाल है कि वह ईरानी सैनिकों को मात्र देखकर रोने लगता है तो ईरानी सैनिकों से क्या लड़ेगा।

बहरहाल जब अमेरिकी सैनिकों ने अपनी मौत अपनी नज़रों के सामने देखी और उन्हें अपना अंजाम समझ में आ गया इसलिए उन्होंने बड़ी शराफत से ईरानी शेरों की बात मान ली और उनके सामने आत्म समर्पण कर दिया। 

 

अमेरिकी सैनिक ने रोकर बता दिया कि हो सकता है कि पूरी दुनिया के देश और उनकी सेनायें हमसे डरती हों मगर हम ईरानी सैनिकों से डरते हैं। आज अमेरिका और जो वर्चस्ववादी शक्तियां ईरान के खिलाफ नित- नये षडयंत्र रचती हैं और तेहरान के खिलाफ जो कर सकती हैं कर रही हैं तो उसकी एक बहुत बड़ी वजह यह है कि ईरान मात्र वह देश है जो अचल पर्वत की भांति अदम्य साहस के साथ पूरी दुनिया के वर्चस्ववादियों के मुकाबले में सीना ताने खड़ा है और यह ईरान है जिसे अमेरिका सहित दुनिया की वर्चस्ववादी ताक़तें अपने मार्ग की सबसे बड़ी रुकावट समझती हैं।

सारांश यह कि अगर ईरान अमेरिका की हां में हां मिलाना आरंभ कर दे तो सारा विवाद खत्म हो जायेगा परंतु ईरान ने वर्चस्ववाद को नकार कर बता दिया है कि हुसैन के मानने वाले समय के किसी भी यज़ीद की बैअत नहीं करते।

नोटः ये व्यक्तिगत विचार हैं। पार्सटूडे का इनसे सहमत होना ज़रूरी नहीं है। MM

 

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