Jan २८, २०२२ १५:४० Asia/Kolkata

क़तर के विदेशमंत्री और उप प्रधानमंत्री मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान आले सानी ने 27 जनवरी गुरुवार को ईरान का दौरा किया और उन्होंने ईरान के विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान से भेंटवार्ता की।

यह यात्रा एसी स्थिति में अंजाम पायी है कि दोनों देशों के विदेशमंत्रियों ने मंगलवार को भी टेलीफ़ोनी वार्ता की थी। गुरुवार और मंगलवार को होने वाली वार्ताओं से पता चलता है कि दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचारविमर्श किया। क्षेत्रीय मुद्दों और द्विक्षपीय संबंधों पर दोनों देशों के विदेशमंत्रियों ने चर्चा की।

क्षेत्रीय मुद्दों में एसा लगता है कि राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी और विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने अमरीका से ईरान की सीधी वार्ता की संभावना के बारे में क़तर के विदेशमंत्री से चर्चा की थी। ईरान और गुट 4+1 के बीच विएना में वार्ता जारी है और अमरीका भी अपरोक्ष रूप से वार्ता में मौजूद है और अभी तक ईरान और अमरीका के प्रतिनिधियों के बीच कोई मुलाक़ात नहीं हुई।

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री ने सोमवार को ईरान और पड़ोसी देशों के बारे में विदेशमंत्रालय के राजनैतिक और अंतर्राष्ट्रीय शोध केन्द्र में होने वाली कांफ़्रेंस में कहा था कि अगर उच्च गैरेंटी के साथ एक अच्छे समझौते तक पहुंचने के लिए वार्ता प्रक्रिया में ज़रूरी हुआ कि अमरीका के साथ किसी भी स्तर की वार्ता की जाए तो हम उसको नज़र अंदाज़ नहीं करेंगे।

राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने भी मंगलवार को जनता से संबोधन में अमरीका से सीधी वार्ता की संभावना रद्द नहीं की थी और इसको तेहरान के विरुद्ध लगे प्रतिबंधों को हटाने से सशर्त किया था। राष्ट्रपति का कहना था कि अभी तक अमरीका से सीधी वार्ता नहीं हुई है और अगर सामने वाला पक्ष तेहरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने को तैयार हो जाए तो हर प्रकार के समझौते का रास्ता मिल सकता है।  

इस बयान का अमरीकी अधिकारियों ने स्वागत किया। अमरीका विदेशमंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी ने पत्रकारों से बात करते हुए ईरान के विदेशमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वाशिंग्टन, परमाणु वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए ईरान से सीधी और तुरंत वार्ता के लिए तैयार है।

इस विषय के दृष्टिगत एसा लगता है कि क़तर के विदेशमंत्री और उप प्रधानमंत्री मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान आले सानी भी ईरान के लिए अमरीका की तरफ़ से संदेश लाए थे और उन्होंने क़तर की विदेश नीति का पुराना काम यानी देशों के बीच मध्यस्थता का काम करने का प्रयास किया। इससे पहले भी क़तर कई बार तेहरान और वाशिंग्टन के बीच मध्यस्थता कर चुका है या दोनों ओर से संदेश ले जा चुका है। (AK)

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