May २५, २०२२ १९:३३ Asia/Kolkata

ओमान वह देश है जो सुलह कराने, मध्यस्थ की भूमिका निभाने और निष्पक्ष रहने में मशहूर है।

ओमान का क्षेत्रफल तीन लाख वर्गमीटर से अधिक है और वहां की जनसंख्या लगभग 50 लाख है। भौगोलिक दृष्टि से क्षेत्र के तीन महत्वपूर्ण देशों सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात और यमन के साथ उसकी सीमायें मिलती हैं। ओमान की नीति संकटों के समाधान, तनावों को कम करने और मध्यस्थ देश की भूमिका निभाने की रही है। यमन के संबंध में उसने जो नीति अपना रखी है उसे इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।

ओमान एक महत्वपूर्ण अरब देश है जिसने सात वर्षों के दौरान कई बार युद्धरत यमनी गुटों की मेज़बानी की है। इस समय यमन और सऊदी अरब के मध्य जो दो महीने का युद्ध विराम चल रहा है उसमें भी ओमान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहां एक अन्य बिन्दु का उल्लेख ज़रूरी है और वह यह है कि ओमान पूरी कोशिश करता है कि उसकी विदेश नीति एक स्वतंत्र देश की रहे और उसकी विदेश नीति किसी भी देश की नीति से प्रभावित न हो। इसी आधार पर वर्ष 2017 में जब सऊदी अरब, संयुक्त इमारात, बहरैन और मिस्र ने कतर से संबंध विच्छेद कर लिया था तब भी ओमान ने कतर से संबंध नहीं तोड़ा जबकि उस पर कतर से संबंध तोड़ने के लिए भारी दबाव था।

ओमान के इस्लामी गणतंत्र ईरान के साथ भी बहुत अच्छे संबंध हैं और उसने तेहरान के साथ अपने संबंधों को दूसरे देशों के दबावों व नीतियों से प्रभावित नहीं होने दिया है। सऊदी अरब जैसे देशों के विपरीत ओमान, ईरान को अरब देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने वाले के रूप में नहीं देखता बल्कि वह ईरान को क्षेत्र में शांति स्थापित कराने वाले देश के रूप में देखता है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात जैसे कुछ देश ईरान को दूसरे अरब देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने वाले देश के रूप में देखते हैं और इसी निराधार चीज़ को आधार बनाकर सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात और बहरैन ने वर्ष 2016 में ईरान से कूटनयिक संबंध तोड़ लिये परंतु ओमान ने इन देशों की नीतियों का अनुपालन व अनुसरण नहीं किया।  

रोचक बात यह है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात एसी स्थिति में ईरान पर अरब देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप मढ़ रहे हैं जब खुद दूसरे देशों के आंतरिक मामलों मे न केवल हस्तक्षेप कर रहे हैं बल्कि वहां अपनी कठपुतली सरकार स्थापित करना चाहते हैं। 26 मार्च 2015 से सऊदी अरब ने सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना यमन पर अपना पाश्विक हमला आरंभ कर रखा है। उसके इन पाश्विक हमलों में दसियों हज़ार यमनी मारे जा चुके हैं, मारे जाने वालों में ध्यान योग्य संख्या बच्चों और महिलाओं की है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात यमन में जो कुछ कर रहे हैं वह दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं तो क्या है?

बहरहाल ओमान के ईरान के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं और ये संबंध न केवल दोनों देशों बल्कि क्षेत्रीय देशों के भी हित में हैं। MM

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