Jun २१, २०२२ १८:५६ Asia/Kolkata
  • अरब नेताओं को क्यों लग रहा है कि इस्राईल अब ईरान से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने जा रहा है? बाइडन पे पहुंचने से पहले क्या खिचड़ी पक रही है?

पश्चिमी एशिया के इलाक़े में इस समय बहुत तेज़ कूटनैतिक और राजनैतिक गतिविधियां हो रही हैं और वो भी कई मोर्चों पर एक साथ। बिन सलमान ने क़ाहेरा का दौरा किया, जार्डन और तुर्की की आनन फ़ानन में यात्रा का एलान हुआ। शरमुश्शैख़ में मिस्र ने जार्डन और बहरैन के नरेशों की मेज़बानी की। आख़िर हो क्या रहा है जिसकी इतनी तैयारियां हैं?

सबसे बड़ा मुद्दा इस्राईल पर छाया हुआ ख़ौफ़ है जिसका कोई नाम नहीं ले रहा है। इस ख़ौफ़ की वजह ईरान और उसके घटकों की तेज़ी से बढ़ती ताक़त है। इस्राईल अब यही ख़ौफ़ अरब देशों ख़ास तौर पर फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों को निर्यात करने की फिराक में है।

इस्राईल के युद्ध मंत्री बेनी गांट्स इस्राईली संसद में बयान देते हुए कहा कि इस्राईल इस समय अमरीका के साथ मिलकर मिडिल ईस्ट में नया एयर डिफ़ेन्स सिस्टम स्थापित करने पर काम कर रहा है। इसका मक़सद इलाक़े में इस्राईल के घुलने मिलने के लिए हालात अनुकूल बनाना और ईरान को अलग थलग करना है। सवाल यह है कि अरब सरकारों को इतनी चिंता क्यों है और वह इस्राईल को बचाने के लिए इतनी बेचैन क्यों हैं।

इस्राईल को तो सारा डर ईरान की बढ़ती ताक़त और अपने पतन का है तो फिर अरब देशों को ख़ौफ़ की क्या वजह है। अरबों की बात की जाए तो यह उनके लिए बहुत अच्छा समय है क्योंकि इस इलाक़े में लंबे से लड़ी जाने वाली जंग अब यूरोप स्थानांतरित हो चुकी है तो फिर अरब सरकारें हारे हुए अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन को क्यों यह मौक़ा दे रहे हैं कि वे आकर अरबों के इस चैन को आग लगा दें और अरब देशों को ईरान और इस्राईल के टकराव में झोंकें।

अरबों ने इस्राईल से समझौते किए अमरीका के दबाव में आकर इस्राईल से दोस्ती बढ़ाई लेकिन अब अरब सरकारें इस्राईल की जंग में कूदने की तैयारी कर रही हैं तो यह बहुत बड़ी भूल है।

अरब सरकारों की बात की जाए तो तेल की आमदनी से उनके ख़ज़ाने भर गए हैं। तेल 125 डालर प्रति बैरल के रेट से बिक रहा है और रूस की मेहरबानी से यह क़ीमत 150 डालर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती है। सऊदी अरब जो बजट घाटा झेल रहा था आज उसकी रोज़ाना की आमदनी एक अरब डालर के क़रीब पहुंच रही है। अब हम देख रहे हैं कि इन हालात में अमरीका और इस्राईल मिलकर एक नई जंग शुरू करके अरबों के पैसे उसमें झोंक देने की कोशिश में लग गए हैं।

यह बड़ी ज़हरीली खिचड़ी है जो इस्राईल ने पकाई है। बाइडन की देखभाल में अमरीका सुपर पावर की पोज़ीशन गवां चुका है। यूक्रेन युद्ध में उसकी कमज़ोरी साफ़ नज़र आने लगी है। हमारी समझ में यह बात नहीं आती कि अरब सरकारें कब तक उन ताक़तों के हाथ का खिलौना बनी रहेंगी जो उनकी दिन रात बेइज़्ज़ती करते हैं और उनकी दौलत लूटने से थकते नहीं।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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