Jun २३, २०२२ १४:४८ Asia/Kolkata

रूस के विदेशमंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने बुधवार को इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी से भेंटवार्ता की। रूस के विदेशमंत्री सर्गेई लावरोफ़ इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान के निमंत्रण पर तेहरान के दौरे पर हैं।

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने बुधवार की शाम इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी से मुलक़ात की और कई अहम मुद्दों पर बातचीत की।

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ अपनी तेहरान यात्रा के दौरान ईरानी अधिकारियों के साथ दीर्घकालिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने और पश्चिम द्वारा हर दिन प्रतिबंधों के बढ़ते दबाव के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के विकास और विस्तार से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेंगे। सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान समेत क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग भी रूसी विदेश मंत्री की तेहरान यात्रा के दौरान द्विपक्षीय वार्ता के मुख्य विषयों में होगा। इसी तरह परमाणु वार्ता का मुद्दा भी उन मुद्दों में शामिल है जिन पर वरिष्ठ रूसी राजनयिक अपने ईरानी समकक्ष के साथ चर्चा करेंगे।

यह यात्रा एसी हालत में अंजाम पायी है कि रूस के विदेशमंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने 3 जून को अपने ईरानी समकक्ष के साथ होने वाली टेलीफ़ोनी वार्ता में ईरान की अपनी अगली यात्रा पर ख़ुशी ज़ाहिर की और हर क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों और सहयोग को अग्रसर बताया था। रूस के विदेशमंत्री ने इस वार्ता में जो ईरान के विरुद्ध बोर्ड आफ़ गवर्नर्ज़ के प्रस्ताव के पास होने से पहले अंजाम पायी थी, इस प्रस्ताव का मास्को द्वारा विरोध किए जाने का एलान किया था और कहा था कि ईरान और एजेन्सी के बीच सहयोग के कार्यक्रम का विषय तकनीकी माध्यमों द्वारा हल किया जाना चाहिए।

इस्लामी गणतंत्र ईरान और रूस के बीच आर्थिक, सामरिक, सुरक्षा और इसी तरह क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग और विचार विमर्श जारी है। इसी के साथ दोनों ही देश एकपक्षीयवाद का मुक़ाबला करने के लिए समान दृष्टिकोण भी रखते हैं। हालिया वर्षों में दोनों पक्षों के बीच नज़दीकी सहयोग के यही कारण रहे हैं।

सीरिया मुद्दे, पश्चिमी एशिया और अपने पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में अमरीका के बढ़ते प्रभाव, क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर रूस और ईरान के समाधान दृष्टिकोण हैं और 2015 में जब सीरिया संकट चरम पर पहुंच गया था तब दोनों देशों ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद से मुक़ाबले के लिए सहयोग किया था जिसकी वजह से क्षेत्र की स्थिरता पर गहरा प्रभाव पड़ा। (AK)

 

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