Jul ०२, २०२२ १७:०३ Asia/Kolkata

ईरान के विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान सीरियाई अधिकारियों से भेंटवार्ता के उद्देश्य से दमिश्क पहुंचे हैं।

इस बात की जानकारी विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनआनी ने दी और कहा कि विदेशमंत्री की सीरिया यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में विचारों का आदान- प्रदान करना है। विदेशमंत्री की सीरिया यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पिछले सप्ताह 27 जून को विदेशमंत्री ने तुर्की की यात्रा की और इस देश के अधिकारियों से द्विपक्षीय और सीरिया सहित क्षेत्रीय समस्याओं व विषयों के बारे में वार्ता की थी।

विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोगान के साथ मुलाकात में बल देकर कहा था कि तेहरान सीरिया में हर प्रकार की सैन्य कार्यवाही का विरोधी है। तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा है कि उनका देश सीरिया के उत्तर में सैन्य कार्यवाही करने वाला है। आतंकवाद से मुकाबले के बहाने सीरिया और इराक में तुर्की द्वारा हमला क्षेत्र के उन विषयों में से है जिनके बारे में मतभेद हैं।

ईरान का मानना है और वह बल देकर कहता है कि राजनीतिक मार्गों से सीरिया संकट का समाधान होना चाहिये और यह वह बात है जिसके बारे में विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने कहा है कि तुर्की की सुरक्षा चिंताओं के समाधान का मार्ग एक मात्रमार्ग राजनीति है और हर प्रकार के हमले के दोबारा न किये जाने के साथ बल देकर कहते हैं कि सार्थक वार्ता की भूमि प्रशस्त करने के लिए वह तैयार हैं। तेहरान के अनुसार सीरिया में शांति व सुरक्षा की स्थापना में इस्लामी इस्लामी गणतंत्र ईरान शक्तिशाली उपस्थिति ज़रूरी है। उसकी मुख्य वजह यह है कि ईरान ने आतंकवाद से मुकाबले में सीरिया में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है और अगर आतंकवाद से मुकाबले में ईरान ने इराक और सीरिया की मदद न की होती तो आज इन देशों में आतंकवादी गुटों की सरकारें होतीं।

इस समय राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों में ईरान और सीरिया के संबंधों में दिन प्रतिदिन वृद्धि हो रही है और बहुत से मामलों में ईरान और सीरिया के दृष्टिकोण समान हैं। जैसे दोनों देश सीरिया में विदेशी सैनिकों की उपस्थिति और हमलों के विरोधी हैं। इसी प्रकार ईरान और सीरिया जायोनी शासन और अरब देशों के साथ संबंधों के सामान्य बनाये जाने के भी विरोधी हैं।

साथ ही कुछ मामलों में ईरान और तुर्की के मध्य मतभेद होने के बावजूद यमन में युद्ध विराम और परिवेष्टन समाप्त करने और इसी प्रकार फिलिस्तीन समस्या के समर्थन में दोनों देशों का दृष्टिकोण समान है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान की विदेश नीति स्वतंत्र है और वह क्षेत्रीय देशों के आंतरिक मामलों में बाहर के देशों के हस्तक्षेप का विरोधी है और उसका मानना है कि क्षेत्रीय देशों के सामूहिक प्रयास व सहयोग से शांति व सुरक्षा को सुनिश्चित बनाया जा सकता है। इस समय भी जब इस बात की संभावना है कि तुर्की सीरिया में न्या सैन्य आप्रेशन आरंभ कर सकता है तो ईरान के कूटनयिक प्रयास तेज़ हो गये हैं। ईरान के विदेशमंत्री अमीर हुसैन अब्दुल्लाहियान की तुर्की के बाद सीरिया यात्रा को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। MM

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