Jul २५, २०२२ १८:५७ Asia/Kolkata
  • ईरान का यह बयान क्या संदेश देता है कि परमाणु वार्ता में हमें कोई जल्दबाज़ी नहीं, किसी दबाव में आकर अपने राष्ट्रीय हितों को क़ुरबान नहीं कर सकते?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनआनी का बड़ा महत्वपूर्ण बयान आया है जिससे यह अंदाज़ा लगाना आसान है कि ईरान और अमरीका के बीच यूरोपीय संघ के माध्यम से होने वाली वार्ता की इस समय क्या स्थिति है।

प्रवक्ता ने दो टूक शब्दों में कहा कि तेहरान परमाणु मुद्दे और पाबंदियां हटाने के विषय में वार्ता में किसी भी जल्दबाज़ी में नहीं पड़ेगा और पश्चिमी देशों की तरफ़ से लाख दबाव डाला जाए तेहरान अपने मूल हितों की क़ुरबान नहीं करेगा।

तेहरान और पश्चिमी देशों के बीच होने वाली वार्ता और उससे जुड़ी ख़बरों व समीक्षाओं को अगर ध्यान से देखा जाए तो यह बात बहुत साफ़ नज़र आती है कि पश्चिमी मीडिया और अधिकारी यह माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि जैसे अमरीका की जो बाइडन सरकार परमाणु समझौते में वापस आने में दिलचस्पी तो रखती है मगर वह ईरान को ज़्यादा समय हरगिज़ नहीं देना चाहती बल्कि ईरान इस बारे में जल्द फ़ैसला करे।

यह दरअस्ल अमरीका की चाल है। पहले तो अमरीकी सरकार और मीडिया ने यह माहौल बनाया कि जो बाइडन सरकार ट्रम्प सरकार के फ़ैसले से संतुष्ट नहीं है और परमाणु समझौते को बहाल करना चाहती है ताकि तेहरान अमरीका की नई सरकार को अलग नज़र से देखे और यह बयान बार बार न दे कि अमरीका भरोसा करने के क़ाबिल नहीं है। दूसरी बात यह कि तेहरान जो बाइडन सरकार के इसी एलान पर भरोसा कर कि अमरीका परमाणु समझौते में वापस आना जाता है वरना ईरान के हाथ से परमाणु समझौते की बहाली का मौक़ा निकल जाएगा।

मगर दूसरी ओर ईरान की सैयद इब्राहीम रईसी की सरकार, उनके विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान और परमाणु वार्ताकार अली बाक़ेरी ने मोर्चा संभाल रखा है। इन अधिकारियों के बयानों को सुनिए तो साफ़ ज़ाहिर होगी कि देश के भीतर उत्पादन को बढ़ावा देना उनकी पहली प्राथमिकता है, क्षेत्रीय और पड़ोसी देशों के साथ व्यापार को बढ़ावा देना उनकी दूसरी प्राथमिकता है, क्षेत्रीय देशों के साथ हर तरह का तनाव दूर करके सहयोग का माहौल मज़बूत करना भी इस सरकार की अहम प्राथमिकता है जबकि परमाणु वार्ता और परमाणु समझौता भी ईरान की प्राथमिकता तो है लेकिन तेहरान सरकार की नज़र में यह एसी प्राथमिकता हरगिज़ नहीं है कि हर क़ीमत पर उसे अंजाम देना है। ईरान ने साफ़ कर दिया है कि वह इस बात के लिए हरगिज़ तैयार नहीं है कि अमरीका फिर धोखा दे। ईरान मज़बूत समझौते की बात कर रहा है ताकि अमरीका धोखा न दे सके।

यहीं से यह भी समझा जा सकता है कि अमरीकी पाबंदियां ईरान की अर्थ व्यवस्था को नाकाम और ध्वस्त नहीं कर पाईं जैसा कि अमरीका को उम्मीद थी। ईरान मज़बूत स्थिति में है और इसी मज़बूत स्थिति में मज़बूत स्वर में मज़बूत समझौता करना चाहता है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हालिया बयान से इस विश्वास की झलक साफ़ नज़र आती है।

 हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

ट्वीटर पर हमें फ़ालो कीजिए 

फेसबुक पर हमारे पेज को लाइक करें

टैग्स