Aug १७, २०२२ १७:१० Asia/Kolkata
  • अरबईने हुसैनी में ईरान से इराक़ जाने वाले विदेशी श्रद्धालुओं के लिए 20 मोहर्रम से खुल जाएगी सीमा, लेकिन इस बात का रहे ख़्याल!

ईरान के खुज़िस्तान प्रांत में खुर्रमशहर के विशेष गवर्नर ने एक बयान जारी करके कहा है कि अरबईने हुसैनी में भाग लेने के लिए विदेशी नागरिकों की आवाजाही के लिए ईरान-इराक़ सीमा का शलम्चे बॉर्डर ही एकमात्र रास्ता होगा।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, इस्लामी कैलेंडर के दूसरे महीने सफ़र की 20 तारीख़ जो इस साल सितंबर महीने की 17 तारीख़  हो सकती है, इस दिन पैग़म्बरे इस्लाम (स) के प्राणप्रिय नवासे हज़रत इमाम हुसैन (अ)  और उनके वफ़ादार साथियों का चेहल्लुम है। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से श्रद्धा रखने वाले दुनिया भर के लोग विशेषकर शिया मुसलमान इस दिन इराक़ के पवित्र नगर कर्बला पहुंचना चाहते हैं। तानाशाह सद्दाम के पतन के बाद कर्बला में अरबईन के दिन हर साल श्रद्धालुओं की संख्या एक नया रिकॉर्ड बना रही है। यह साल क्योंकि कोरोना महामारी में लगे प्रतिबंधों के बाद का साल है, उसको देखते हुए अरबईन में कर्बला पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की तादाद के बारे में कहा जा रहा है कि इस बार अब तक की सबसे बड़ी संख्या अरबईन के लिए इराक़ के पवित्र नगर कर्बला पहुंचेगी।

इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के श्रद्धालुओं की सेवा में लगी सबीलें

इस बीच जहां इराक़ सरकार ने अरबईने हुसैनी के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं वहीं ईरान ने भी देशी-विदेशी श्रद्धालुओं के लिए अपनी तैयारियां भी आरंभ कर दी हैं। बता दें कि अरबईन के दिन कर्बला पहुंचने वाले विदेशी श्रद्धालों में ईरानी श्रद्धालुओं की संख्या सबसे ज़्यादा होती है। वहीं ईरान की सीमा से होकर इराक़ जाने वाले विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक होती है। लगभग 70 देशों के श्रद्धालु ईरान की सीमा से होते हुए इराक़ जाते हैं। इस बार खुज़िस्तान प्रांत में खुर्रमशहर के विशेष गवर्नर नादिर अमीदज़ादे ने कहा है कि विदेश से आने वाले इमाम हुसैन (अ) के श्रद्धालुओं के लिए इराक़ में प्रवेश के लिए केवल शलम्चे सीमा ही खुली रहेगी। उन्होंने कहा कि 20 मोहर्रम से हम इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के विदेशी श्रद्धालुओं की सेवा के लिए तैयार रहेंगे। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सेवा और सुविधा के लिए जहां ईरानी जनता की ओर से दर्जनों कैम्प लगाए गए हैं वहीं इस बार 10 कैम्प अफ़ग़ानिस्तान की जनता की ओर से और अन्य 10 कैम्प पाकिस्तान, भारत और नाइजीरिया समेत कई अन्य देशों की जनता की ओर से लगाए गए हैं। (RZ)

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