Sep २९, २०२२ १३:२८ Asia/Kolkata
  • दंगों और आलोचनाओं में फ़र्क़ है, दुनिया में कहीं भी दंगे स्वीकार्य नहींः राष्ट्रपति रईसी+ फ़ोटोज़

इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने न्यूयार्क के अपने दौरे के दौरान उठाए गये परमाणु मुद्दे के बारे में कहा कि ईरान ने अपने ताज़ा बयानों में विश्वसनीय गैरेंटी देने पर बल दिया है।

राष्ट्रपति रईसी ने बुधवार की रात ईरान के नेश्नल टेलीवीजन चैनल के एक कार्यक्रम में देश के परमाणु कार्यक्रम के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि फ़्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रां से होने वाली मुलाक़ात की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस मुलाक़ात में ईरानी जनता के आर्थिक हितों के दाएरे में प्रतिबंधों की समाप्ति और सेफ़गार्ड के मामले के हल पर पर बल दिया गया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मैक्रां के साथ मुलाक़ात में मानवाधिकार के मुद्दे पर भी विचार विमर्श किया गया और पश्चिम तथा यूरोप में मानवाधिकारों के हनन और मानवाधिकारों के क्षेत्र में उनके दोहरे मापदंडों का हवाला दिया गया।

राष्ट्रपति सैयद रईसी ने शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र संघ के वार्षिक अधिवेशन में भाषण और मुलाक़ातों के बारे में कहा कि शंघाई में ईरान की सदस्यता एक अहम विषय है और आर्थिक दृष्टिकोण से हम आर्थिक ढांचे से जुड़ गये हैं।

राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने कहा कि हमारे ख़याल में ईरान और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी के बीच उठाए गये मामले राजनैतिक हैं, ईरानी जनता में आर्थिक लाभों से लाभान्वित होने के लिए सेफ़गार्ड के मुद्दे को हल करना और प्रतिबंधों को हटाना, परमाणु वार्ता में हमारी अन्य मांगें हैं।

राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने कहा कि हमने द्विपक्षीय मुलाक़ातों में प्रतिबंधों के बावजूद ईरान के साथ आर्थिक सहयोग में विस्तार पर बल दिया और हमारा मक़सद सारे देशों के साथ वार्ता करना है।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के वार्षिक अधिवेशन में जनरल क़ासिम सुलैमानी की तस्वीर दिखाने के बारे में कहा कि मैं इस कार्यवाही से यह बात याद दिलाना चाहता था कि दाइश का संस्थापक अमरीका है और दाइश व आतंकवाद के विरुद्ध जंग के हीरो जनरल क़ासिम सुलैमानी हैं और उन्हीं को अमरीका और पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति ने शहीद कर दिया, मैं यह कहना चाहता था कि अमरीका मानवाधिकारों का झूठा दावा करता है।

राष्ट्रपति ने महसा अमीनी की मौत और उसके बाद होने वाले उपद्रवों और दंगों के बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में कहा कि हम महसा अमीनी की घटना में पारदर्शिता चाहते हैं और अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके विरुद्ध कार्यवाही होगी।

उन्होंने कहा कि ईरानी जनता इस बात पर सहमत है कि देश में हर प्रकार की अशांति जनता की जान व माल और शांति में विघ्न का कारण है, इसीलिए यह स्वीकार्य नहीं है और ईरानी जनता ने दंगाईयों और उपद्रवियों की क्रांति विरोधी कार्यवाहियों का खंडन किया है। उनका कहना था कि दंगाई और उपद्रवी, अतीत में होने वाले दंगों और उपद्रों की ओर देश को ढकेलना चाहते थे लेकिन उसमें उन्हें विफलता का सामना करना पड़ा।

राष्ट्रपति ने प्रतिबंधों और दंगों को एक ही सिक्के का दो रुख़ क़रार देते हुए कहा कि आलोचना और दंगों में अंदर होता है और दुनिया के किसी भी स्थान पर दंगे और अंशाति स्वीकार नहीं है। (AK)

 

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