Oct ०२, २०२२ १८:५४ Asia/Kolkata
  • ईरान के विभाजन का ख़्वाब देखने वालों के सपने हुए चकनाचूर, देश की ताज़ा स्थिति को लेकर राष्ट्रपति रईसी का महत्वपूर्ण बयान

इस्लामी गणराज्य ईरान के राष्ट्रपति ने हालिया दिनों में दुश्मनों द्वारा देश को नुक़सान पहुंचाने की साज़िशों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ईरान को बांटने की दुश्मनों की साज़िश पूरी तरह नाकाम हो गई है।

समचार एजेंसी फ़ार्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस्लामी गणराज्य ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने हाल के दिनों में दुश्मनों द्वारा रचे गए षड्यंत्रों को देश के विकास में बाधा डालने का प्रयास बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में कि जब इस्लामी गणराज्य ईरान आर्थिक समस्याओं पर क़ाबू पा रहा है और क्षेत्र और दुनिया में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रहा है, तब दुश्मन ईरान के विकास के रथ को रोकने के लिए और देश को बांटने की साज़िश के साथ मैदान में उतर आए हैं, लेकिन दुश्मनों की साज़िशें एक बार फिर नाकाम हो गई हैं। राष्ट्रपति रईसी ने ईरान के ख़िलाफ़ पश्चिमी मीडिया के दुष्प्रचार और उनके दोहरे मापदंड का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में कि जब ईरान में महसा अमीनी की मौत के मुद्दे पर पूरी पार्दर्शिता के साथ जांच की जा रही है और संवेदनशीलता के साथ उसपर सटीक रूप से ध्यान दिया जा रहा है, साथ ही सभी अधिकारी  इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं। लेकिन दुश्मन व्यापकता के साथ मीडिया का सहारा लेकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। राष्ट्रपति रईसी ने इस मौक़े पर अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका का समर्थन प्राप्त आतंकवादी गुट द्वारा स्कूली छात्राओं और छात्रों को आत्माघाती बम से उड़ाए जाने पर दुनिया की चुप्पी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में अमेरिका समर्थित आतंकी गुट के आतंक की भेंट चढ़ी बच्चियों की मौत पर मानवाधिकार का ढिंढोरा पीटने वाले ख़ामोश क्यों हैं? पश्चिमी देश किस मुंह से मानवाधिकारों और महिलाओं के अधिकारों की बाते करते हैं?

अफ़ग़ानिस्तान का शिक्षा केंद्र जहां आतंकवादी हमला हुआ था

उल्लेखनीय है कि हालिया दिनों में ईरान की इस्लामी क्रांति के दुश्मनों द्वारा संचालित मीडिया, महसा अमीनी की मौत का बहाना बनाकर इस्लामी व्यवस्था के ख़िलाफ़ युवाओं को उकसा रहा है। जिसके परिणास्वरूप ईरान के कई शहरों में दंगाईयों और उपद्रवियों द्वारा सार्वजनिक संपत्तियों को नुक़सान पहुंचाया गया है। गाड़ियों, मोटरसाइकिलों, बैंकों में जहां दंगाईयों द्वारा आग लगाई गई है वहीं उपद्रवियों द्वारा सुरक्षा कर्मियों पर भी हमला किया गया है। दंगाईयों द्वारा की जाने वाली कार्यवाहियों के कारण समाज के आम नागिरकों में डर का माहौल पैदा होता जा रहा है। वहीं विदेशों से संचालित होने वाले सोशल मीडिया मंच के विभिन्न प्लेटफॉर्मों के ज़रिए भी इन दंगों का हवा दी जा रही है। (RZ)

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