Oct ०३, २०२२ १७:२५ Asia/Kolkata
  • हिंसा और दंगों की घटनाएं अमरीका और जाली ज़ायोनी शासन की साजिशों का नतीजा था

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने आर्म्ड फ़ोर्सेज़ की डिफ़ेन्स युनिवर्सिटियों के कैडिट्स की संयुक्त पासिंग आउट परेड समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हालिया दंगे और हिंसा अमरीका और जाली ज़ायोनी शासन की साज़िश का नतीजा था जबकि उनके ख़रीदे हुए तत्वों और विदेशों में रहने वाले कुछ ग़द्दार ईरानियों ने उनका हाथ बटाया।

आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने सोमवार को अपने भाषण मं कहा कि इस घटना में भी ईरान की क़ौम पिछली घटनाओं की तरह ही बहुत मज़बूती के साथ सामने आई और भविष्य में भी इसी अंदाज़ से सामने आएगी और जहां भी दुश्मन गड़बड़ी पैदा करेंगे वहां सबसे ढाल बनकर जो ताक़त खड़ी होगी वह ईरान की बहादुर और मोमिन क़ौम है।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता का कहना था कि ईरानी क़ौम भी अपने मौला हज़रत अली अलैहिस्सलाम की तरह मज़लूम लेकिन इसके साथ ही बहुत ताक़तवर है। उन्होंने कहा कि हालिया घटना जो हुई कि एक नौजवान लड़की की मौत हो गई उससे हम सब को सदमा पहुंचा लेकिन इस घटना पर बिना किसी जांच और बिना किसी सुबूत के कुछ लोग सड़कों पर उतर कर अशांति फैला दें, क़ुरआन जलाएं, हिजाब वाली महिलाओं का हिजाब खींच लें, मस्जिद, इमामबाड़े और लोगों की गाड़ियों को आग लगाएं तो यह स्वाभाविक प्रतिक्रिया नहीं है।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने ज़ोर देकर कहा कि हालिया दंगे पूर्व नियोजित मंसूबे का नतीजा है। उन्होंने कहा कि अगर इस लड़की का मसला पेश न आता तब भी किसी और बहाने से ईरानी कैलेंडर के सातवें महीने मेहर की पहली तारीख़ को दंगा होना ही था।

आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने दंगों में बाहरी ताक़तों के लिप्त होने के सुबूत पेश करते हुए कहा कि दुनिया में बहुत सी जगहों पर दंगे हो जाते हैं यूरोप में भी फ़्रांस और पेरिस में थोड़े थोड़े दिनों पर बड़े दंगे होते हैं मगर कहां यह देखने में आता है कि अमरीका के अधिकारी आकर दंगाइयों का समर्थन करें।

उन्होंने कहा कि किसी लड़की की मौत पर अमरीकियों का खेद और दुख जताना घड़ियाली आंसू बहाना है, हक़ीक़त यह है कि वो इस लड़की की मौत का बहाना मिल जाने पर बहुत ख़ुश हैं। इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने कहा कि देश में तीनों पालिकाओं के प्रमुखों ने इस पर गहरा दुख जताया है और न्यायपालिका ने वादा किया है कि इस मामले की तह तक जाएगी।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने सारे क्षेत्रों में ईरान की तरक़्क़ी के रफ़तार पकड़ने की हक़ीक़त का ज़िक्र करते हुए कहा कि दुश्मन नहीं चाहते कि ईरान में यह तरक़्क़ी हो इसीलिए वे तरक़्क़ी का रास्ता रोकने के लिए, युनिवर्सिटियों को बंद करवाने, सड़कों पर दंगे करवाने और अधिकारियों को उलझाने के लिए नई नई समस्याएं पैदा कर रहे हैं।

कुर्दिस्तान और सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांतों की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मैं बलोच जाति के बीच रह चुका हूं वे दिल की गहराई से इस्लामी रिपब्लिक के वफ़ादार हैं और कुर्द जाति भी वतन, इस्लाम और इस्लामी व्यवस्था की वफ़दार और उससे गहरी मुहब्बत करने वाली क़ौम है। इसलिए इन इलाक़ों में दुश्मनों की साज़िशें कामयाब नहीं हो सकेंगी।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने कहा कि दुश्मनों के मंसूबे और गतिविधियां उनकी अस्लियत का आईना हैं, वो दुश्मन जो अपने कूटनैतिक बयानों में बार बार कहता है कि ईरान पर हमला करने और वहां की इस्लामी व्यवस्था बदलने का उसका कोई इरादा नहीं है उसकी अस्लियम यह है कि दंगे भड़काने और हिंसा की आग लगाकर देश की सुरक्षा को ख़त्म कर देने की कोशिश में है।

आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने कहा कि बहुत सी महिलाओं जो मुकम्मल तरीक़े से हिजाब भी नहीं पहनतीं वे भी इस्लमी रिपब्लिक सिस्टम की समर्थक हैं अलग अलग कार्यक्रमों में वे शिरकत करती हैं, यहां लड़ाई ईरान की स्वाधीनता और प्रतिरोध की लड़ाई है।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता का कहना था कि कुछ युवा बहकावे में आकर सड़कों पर निकले मगर कुछ तत्व वे हैं जो अलगाववादी सोच रखते हैं या राजशाही व्यवस्था दोबारा लागू करने की कोशिश में रहने वालों में हैं, न्यायपालिका को चाहिए कि हर किसी को दंगों और विध्वंस में उसकी भागीदारी की सतह के अनुरूप सज़ा दे।

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