Jul १०, २०१८ १९:४५ Asia/Kolkata
  • हुरमुज़ स्ट्रेट को बंद करने की ईरान की धमकी , अरब देश वैकल्पिक मार्ग की खोज में ... यह हो सकते हैं कुछ विकल्प!

अरब देश स्ट्रेट आफ हुरमुज़ के महत्व को कम करने और ईरान की ओर से उसे बंद करने की धमकी के प्रभावहीन बनाने के लिए कई दिशाओं में प्रयास कर रहे हैं।

      हालिया दिनों में ट्रम्प सरकार की ओर से ईरान के तेल निर्यात को शून्य तक पहुंचाने की धमकी के बाद ईरान के राष्ट्रपति ने सांकेतिक रूप  धमकी दी थी कि यदि ईरान का तेल निर्यात नहीं होगा तो किसी का तेल भी निर्यात नहीं होगा। इसे सीधे सीधे हुरमुज़ जलडमरू मध्य बंद करने की धमकी समझा गया। ईरान पहले भी साफ साफ यह कह चुका है कि खतरा होने पर वह स्ट्रेट आफ हुरमुज़ बंद कर देगा और यह काम उसके लिए एक ग्लास पानी पीने जितना आसान है।

           सन 2006 में अमरीका व ईरान के मध्य तनाव बढ़ने के साथ ही जब सैनिक टकराव की आशंका पैदा हो गयी तो उसके साथ ही स्ट्रेट आफ हुरमुज़

बंद होने का भी खतरा बढ़ गया जिससे पूरी दुनिया और खास तौर पर तेल निर्यात करने वाले अरब देशों में हडकंप मच गया क्योंकि दुनिया का चालीस प्रतिशत तेल इसी रास्ते से जाता है और बहुत से अरब देशों का 100 प्रतिशत तेल इसी राह से दुनिया तक पहुंचता है इसी लिए कुछ अरब देशों ने अपने तेल के निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्ग खोजने का अभियान तेज़ी के साथ आरंभ कर दिया, कई रास्तों पर विचार किया गया जिनमें से एक यूएई के अलफुजैरा बंदरगाह से ओमान सागर तक पाइप लाइन बिछाना है ताकि ईरान की ओर से स्ट्रेट आफ हुरमुज़ बंद किये जाने की दशा में, तेल के संकट से बचा जा सके।

 

संयुक्त अरब इमारात ने 30 जून सन 2012 में 3.3 अरब डॉलर की लागत से हबशान- अलफुजैरा तेल पाइप लाइन निर्माण का उद्घाटन किय। इस पाइप लाइन की लंबाई 380 किलोमीटर होगी और पूरी पाइप लाइन, यूएई में होगी।

हबशान- अलफुजैरा तेल पाइप लाइन को यूएई स्ट्रेट ऑफ़ हुरमुज़ का विकल्प बनाना चाह रहा है जो  पश्चिम एशिया का एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है जो ईरान के दक्षिण में फ़ार्स की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच में स्थित है और इसे दुनिया का दूसरा सब से अधिक भीड़ – भाड़ वाला जलमार्ग समझा जाता है और अमरीकी ऊर्जा मंत्रालय ने इसे दुनिया का सब से अधिक महत्वपूर्ण जलमार्ग कहा है। यह फ़ार्स की खाड़ी से खुले सागर तक पहुंच के लिए एकमात्र समुद्री मार्ग है और यह रणनीतिक रूप से  सब से महत्वपूर्ण  जलमार्गों में शामिल है।

उसके उत्तरी तट पर ईरान स्थित है तो दक्षिणी तट पर इराक़, कुवैत, सऊदी अरब, बहरैन, क़तर, संयुक्त अरब इमारात और ओमान स्थित हैं। स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ की चौड़ाई कुछ जगहों पर इतनी कम है कि बड़े बड़े विमान वाहक युद्धपोतों और विशालकाय टैंकरों पर वहां से संभल कर गुज़रना पड़ता है।

सऊदी अरब का 88 प्रतिशत, इराक़ का 98 प्रतिशत, यूएई का 99 प्रतिशत और कुवैत व क़तर का 100 फीसद तेल हुरमुज़ जलमार्ग से गुज़रता है।

समुद्र द्वारा निर्यात होने वाले दुनिया भर के कुल तेल का क़रीब 40 फ़ीसद तेल स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ से होकर दूसरे देशों तक पहुंचता है।

           स्ट्रेट ऑफ़ हुरमुज़ तेल के निर्यात के लिए ही अहम नहीं बल्कि तेल के अलावा भी 2.9 अरब टन सामान इसी जलमार्ग से गुज़रता है और दुबई बंदरगाह से आजाद समुद्र तक पहुंचने का एकमात्र मार्ग स्ट्रेट ऑफ़ हुरमुज़ है। फार्स की खाड़ी के कई देश, बड़ी बड़ी बंदरगाहें बना रहे हैं जो स्ट्रेट ऑफ़ हुरमुज़ के बंद होने के साथ ही बंद हो जाएंगी तो फिर यूएई एक पाइप लाइन बिछा कर क्या कर सकता है?

स्ट्रेट ऑफ़ हुरमुज़

 

      वैसे भी यह पाइप लाइन , यूएई के तेल उत्पादन का 90 प्रतिशत भाग ही स्थानांतरित कर सकती है जिसका मतलब यह होगा कि पाइप लाइन बिछाने के बाद भी यूएई को अपने 10 प्रतिशत तेल के निर्यात के लिए स्ट्रेट ऑफ़ हुरमुज़  की ज़रूरत रहेगी, अन्य देशों की तो बात ही नहीं, इस लिए इस पाइप लाइन को यूएई की अपनी परियोजना कहा जाता है और इसे किसी भी दशा में अंतरराष्ट्रीय परियोजना का नाम नहीं दिया जा सकता।

 

           इस लिए स्ट्रेट ऑफ़ हुरमुज़ का महत्व, किसी भी तरह से कम नहीं किया जा सकता और यह जो हबशान- अलफुजैरा तेल पाइप लाइन की बात इतना बढ़ा चढ़ा कर की जा रही है तो वह केवल प्रचार की हद तक है व्यवहारिक रूप से उससे कुछ होने वाला नहीं है और इस्लामी गणतंत्र ईरान के हाथ में मौजूद स्ट्रेट ऑफ़ हुरमुज़ नामक इस तलवार की धार की तेज़ी कम करना हबशान- अलफुजैरा तेल पाइप लाइन के बस की बात नहीं! (Q.A.)

 

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