Sep १२, २०१९ २०:१२ Asia/Kolkata

ईरान में इमाम हुसैन के पुत्र इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की शहादत का दिन और भारत व पाकिस्तान में कर्बला के शहीदों का तीजा मनाया गया।

एक रिवायत के अनुसार बारह मुहर्रम इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की शहादत का दिन है। इमाम ज़ैनुल आबेदीन आशूरा के दिन बीमारी के कारण बेहोशी में ग्रस्त थे। धर्मगुरुओं का कहना है कि ईश्वर ने अपनी युक्ति से उन्हें आशूरा के दिन रोगग्रस्त और बेहोश कर दिया था ताकि उन पर जेहाद का दायित्व अनिवार्य न होने पाए और इमामत का क्रम जारी रहे। इमाम हुसैन की शहादत के बाद इमाम सज्जाद ने इस्लामी समुदाय के नेतृत्व के साथ ही इमाम हुसैन के परिजनों के कारवां के नेतृत्व का दायित्व भी निभाया। उन्होंने क़ैद में होने के बावजूद अपने भाषणों से कूफ़े और शाम में क्रांति पैदा कर दी और उन्हें कूफ़ा व शाम के विजेता की उपाधि दी गई। उन्होंने अपने भाषणों से यज़ीद और इब्ने ज़ियाद के चेहरों को बेनक़ाब करके लोगों पर इमाम हुसैन का संदेश और वास्तविक इस्लाम पहुंचा दिया। इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की शहादत के दिन पूरा ईरान शोकाकुल है।

बुधवार की रात तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में एक शोक सभा आयोजित हुई जिसमें वक्ताओं और नौहा पढ़ने वालों ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के साथ ही उनके पुत्र इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की मज़लूमियत पर भी प्रकाश डाला। ईरान के हर स्थान पर पहली मुहर्रम से जारी शोकसभाओं में गुरुवार बारह मुहर्रम को वक्ताओं ने इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम के चरित्र, उनके गुणों व विशेषताओं पर प्रकाश डालने के साथ ही उनकी मज़लूमियत के विभिन्न आयामों का भी उल्लेख किया। पवित्र नगर मशहद से हमारे संवाददाता ने बताया है कि पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम के पवित्र रौज़े में उनके परदादा हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की शहादत के दिन के अवसर पर हज़ारों ईरानियों के साथ ही बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु भी दर्शन के लिए पहुंचे और इस प्रकार उन्होंने पैग़म्बर के परिजनों से अपनी श्रद्धा प्रकट की। इसी तरह पवित्र नगर क़ुम में हज़रत मासूमा सलामुल्लाह अलैहा के पवित्र रौज़े में भी श्रद्धालुओं और पैग़म्बर के परिजनों से प्रेम करने वाले शोकाकुल लोगों की भीड़ है जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी भी दिखाई दे रहे हैं। दूसरी ओर गुरुवार को भारत और पाकिस्तान में कर्बला के शहीदों का सेव्वुम धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शोक सभाओं का आयोजन किया गया जबकि कई स्थानों पर मातमी जुलूस भी निकाले गए। (HN)

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