Oct २०, २०१९ १९:३० Asia/Kolkata
  • इस्लामी जगत के परमाणु वैज्ञानिकों को चुन चुन कर मारता रहा है इस्राईल! इस सरकारी आतंकवाद की सज़ा क्या होनी चाहिए?

इस्राईल की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद ने अब तक कई इस्लामी देशों के परमाणु वैज्ञानिकों की हत्याएं की हैं और इसके लिए उसने अलग अलग तरीक़ों और हथियारों का प्रयोग किया।

इस्राईल ने ईरान के भी परमाणु वैज्ञानिकों की हत्याएं की हैं।

लेबनानी परमाणु वैज्ञानिक रमाल हसन रमाल

रमाल हसन रमाल लेबनान के परमाणु वैज्ञानिक थे। लोपोइन मैगज़ीन के अनुसार वह पैरिस के एक वैज्ञानकि केन्द्र से जुड़े हुए थे। उनकी मौत भी दूसरे कई परमाणु वैज्ञानिकों की तरह बड़े रहस्मय रूप में हो गई। उन्हें एक अन्य परमाणु वैज्ञानिक डाक्टर हसन कामिल सबाह के साथ क़त्ल कर दिया गया। रमाल ने बहुत कम उम्र में ही विश्व स्तर पर परमाणु वैज्ञानिक के रूप में अपनी पहिचान बना ली थी। उन्हें फ्रांस के नेशनल स्टडीज़ सेंटर से वर्ष 1984 और 1988 में ब्रोन्ज़ और सिलवर मेडल मिले। उन्होंने 120 से अधिक रिसर्च पेपर लिखे।

 

सऊदी अरब के आदिल अश्शुवैख़

आदिल अश्शुवैख़ सऊदी अरब के परमाणु वैज्ञानिक थे जिन्होंने प्रकाश पर अध्ययन किया था। उन्होंने बग़दाद युनिवर्सिटी और बरमिंघम युनिवर्सिटी में शिक्षा हासिल की और फिर युनिवर्सिटी प्रोफेसर के रूप में सऊदी अरब और इमारात में काम किया। वर्ष 1993 में तुर्की में उनकी बड़े संदिग्ध रूप से मौत हो गई। था। उन्होंने बग़दाद युनिवर्सिटी और बरमिंघम युनिवर

शुवैख़ ने अरब स्टडीज़ एकेडमी की स्थापना की थी जिसका उद्देश्य अलग अलग वैज्ञानिक क्षेत्रों में अध्ययन और अनुसंधान करना था। उनकी मौत एक एक्सीडेंट में हुई जिसके बारे में बहुत से लोगों का कहना है कि यह जान बूझ कर किया गया एक्सीडेंट था।

 

इराक़

इराक़ की परमाणु गतिविधियों को रोकने के लिए अमरीका और ज़ायोनी शासन की ओर से हस्तक्षेप की दास्तान बहुत लंबी है। फ़्रांस ने वर्ष 1967 में इराक़ को दो परमाणु रिएक्टर देने के लिए बग़दाद के साथ समझौता किया। लेकिन जब इस्राईलियों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने अपने एजेंटों के माध्यम से तोलोन बंदरगाह पर इन रिएक्टरों में गड़बड़ी पैदा कर दी जिसके कारण यह सौदा खटाई में पड़ गया।

इराक़ में अमरीका और इस्राईल ने कई परमाणु तथा अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले वैज्ञानिको की हत्याएं करवाईं। इराक़ी वैज्ञानिकों को पहले तो लुभाया जाता था कि वह इस्राईल या अमरीका में काम करें और अगर वह इंकार करते थे तो उनकी हत्या करवा दी जाती थी।

इराक़ी अख़बार अलबैयनतुल जदीदा ने एक रिपोर्ट में बताया कि इराक़ के 350 से अधिक परमाणु वैज्ञानिक और अन्य विषयों के 200 से अधिक वैज्ञानिक मोसाद के हाथों मारे गए।

मोसाद ने अमरीका की सहमति हासिल करके एक साल के भीतर इन वैज्ञानिकों की हत्याएं कीं। 150 इस्राईली कमांडोज़ की एक टीम इराक़ में उस सयम घुसी जब इस देश पर अमरीका का क़ब्ज़ा हो गया था। एक फ़्रांसीसी जनरल का कहना है कि यह टारगेट किलिंग अमरीका और इस्राईल ने मिलकर की। फ़्रांसीसी जनरल के अनुसार अमरीका और इस्राईल इराक़ के परमाणु वैज्ञनिकों और मिसाइल तकनीक से जुड़े इंजीनियरों को ख़त्म करने की योजना पर काम कर रहे थे और उनकी लिस्ट में 3500 से अधिक इराक़ियों के नाम थे। मोसाद के हाथों मारे जाने वाले इराक़ी वैज्ञानिकों में डाक्टर अली हुसैन कामिल, डाक्टर तक़ी हुसैन तालेक़ानी, डाक्टर तालिब इब्राहीम अज़्ज़ाहिर, डाक्टर माजिद अलजनाबी जैसे वैज्ञानिक शामिल थे।

 

सीरिया

सीरिया भी उन देशों में है जहां परमाणु वैज्ञानिकों की मोसाद ने टारगेट किलिंग की। यह हत्याएं तो पहले भी होती रही हैं लेकिन जब से सीरिया में संकट शुरू हुआ है वैज्ञानिकों की टारगेट किलिंग तेज़ हो गई। अलबत्ता इससे पहले भी इस्राईल सीरिया के परमाणु वैज्ञनिकों की हत्याएं करवाता रहा है। इस्राईल ने वर्ष 2007 में सीरिया के दैरुज़्ज़ूर इलाक़े में स्थित प्रतिष्ठानों पर हमला करके पूरी तरह नष्ट कर दिया। इस्राईल ने वर्ष 2008 में सीरिया के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी जनरल मुहम्मद सुलैमान की हत्या कर दी जो दैरुज़्ज़ूर स्थित परमाणु परियोजना की देखभाल करते थे।

इसके अलावा भी इस्राईल ने सीरिया के कई वैज्ञानिकों की हत्याएं कीं और इस शैली से यह हत्याएं कीं कि इसके लिए सीरिया सरकार को ज़िम्मेदार समझा जाए। एक वैज्ञानिक औस अब्दुल करीम को मोसाद ने एक पुलिस चेकपोस्ट के क़रीब ले जाकर मारा, वह परमाणु वैज्ञानिक थे।

 

ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की हत्याएं

ईरान में 12 जनवरी 2010 को पहले परमाणु वैज्ञानिक डाक्टर मसऊद अली मुहम्मदी की उनके घर के सामने हत्या की गई। उनके घर के सामने एक मोटर साइकिल पार्क की गई थी और उसी में बम रख दिय गया था जिसके धमाके में वह शहीद हो गए। इस घटना के कुछ महीनों बाद 29 नवम्बर 2010 को ईरान के दो परमाणु वैज्ञानिकों पर हमले हुए जिसके नतीजे में डाक्टर मजीद शहरयारी शहीद हो गए जबकि डाक्टर फ़रीदून अब्बासी पर हुआ हमला नाकाम हो गया और वह बच गए। डाक्टर शहरयारी की शहादत के कुछ ही दिनों बाद ईरान की इंटेलीजेन्स ने डाक्टर अली मुहम्मदी के हत्यारे की गिरफ़तारी का एलान किया। हत्यारे का नाम था मजीद जमाली फ़शी। उसने अपन इक़बालिया बयान में बताया कि ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या की योजना इस्राईल बना रहा है। लेकिन अभी यह नहीं मालूम था कि वह कौन व्यक्ति है जो ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों की जानकारियां इस्रईल को दे रहा है।

जुलाई 2011 में ईरान के एक और परमाणु वैज्ञानिक दारयूश रेज़ाई नेजाद को उनके परिवार के सामने शहीद कर दिया गया। इसके कुछ ही महीने बाद एक और परमाणु वैज्ञानिक मुसतफ़ा अहमदी रोशन की हत्या कर दी गई।

शहीद रेज़ाई नेजाद को फ़ायरिंग करके शहीद किया गया जबकि अन्य परमाणु वैज्ञानिकों को मैगनेट बम के प्रयोग से क़त्ल किया गया।

यह तो नहीं मालूम कि ईरान ने इसके जवाब में क्या किया कि टारगेट किलिंग का सिलसिला रुक गया लेकिन ईरान के एक कमांडर ने एक टीवी कार्यक्रम में कहा था कि जब हमारे वैज्ञानिकों की टारगेट किलिंग की घटनाएं बढ़ गईं तो हमने एक बड़ा क़दम उठाया जिसके बाद यह सिलसिला रुक गया।

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