Nov १२, २०१९ १०:४० Asia/Kolkata
  • बश्शार असद ने सीरिया संकट के असली कारणों से पहली बार उठाया पर्दा, सीरियाई राष्ट्रपति ने क़तर की गैस पाइपलाइन का मुद्दा इस समय क्यों छेड़ा? असद ने सीरिया में तेल की अमरीकी चोरी के बारे में क्या बताया?

अरब जगत के विख्यात टीकाकार अब्दुल बारी अतवान का जायज़ाः सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद मीडिया को लंबे इंटरव्यू बहुत कम ही देते हैं लेकिन उन्होंने रशा टुडे को बहुत लंबा इंटरव्यू दिया जो सोमवार के दिन प्रसारित हुआ।

यह बेहद अहम इंटरव्यू है क्योंकि इसमें उन्होंने बहुत खुलकर बात की है और बहुत सी जानकारियां एसी दी हैं जो हमारे ख़याल में पहली बार प्रकाश में आ रही हैं।

तीस सवालों के जवाब में बश्शार असद ने वैसे तो बहुत अधिक जानकारिया दी हैं लेकिन हम इनमें चार के बारे में बात करेंगे जो पहली बार राष्ट्रपति बश्शार असद की ज़बान से सुनी गई हैं अतः यह विश्वसनीय हैं।

  1. बश्शार असद ने सीरिया संकट के शुरू में जो मुद्दा बहुत अधिक चर्चा में था उसका पूरी तरह खंडन किया कि इस सकट का कारण यह था कि बश्शार असद ने अपने देश से क़तर की गैस पाइपलाइन गुज़र कर तुर्की और वहां से यूरोप जाने की परियोजना को अस्वीकार कर दिया था क्योंकि यह पाइपलाइन यूरोप जाने वाली रूसी पाइपलाइन की प्रतिद्वंद्वी बन सकती थी। बश्शार असद ने बताया कि सीरिया संकट का एक कारण पाइपलाइन तो थी लेकिन वह क़तर की गैस पाइपलाइन नहीं थी बल्कि यह पूरब से पश्चिम की ओर जाने वाली ईरानी तेल पाइपलाइन थी। यह ईरानी तेल पाइपलाइन इराक़ की धरती से गुज़र पर सीरिया और फिर सीरिया से भूमध्य सागर तक पहुंचने वाली है। सीरिया ने चूंकि इस पाइपलाइन को हरी झंडी दिखा दी थी इसलिए सीरिया पर गृह युद्ध थोप दिया गया और संकट की आग भड़का दी गई ताकि यह परियोजना आगे न बढ़ सके।

हमारे विचार में इस महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि इस बात से भी होती है कि फ़ार्स खाड़ी के कुछ अरब देशों ने जिनमें क़तर और सऊदी अरब भी शामिल हैं उस समय सीरिया के सामने दसियों अरब डालर की पेशकश की थी कि वह ख़ुद को ईरान से दूर कर ले और इस पाइपलाइन को अपनी धरती से गुज़रने न दे। क़तर के पूर्व प्रधानमंत्री शैख़ हमद बिन जासिम ने यह बात स्वीकार भी की कि सीरिया को ईरान से दूर करने के लिए उन्होंने पहली क़िस्त की रिश्वत के रूप में 15 अरब डालर की पेशकश सीरिया सरकार के सामने की थी। माना जाता है कि इस पूरे प्रकरण के पीछे अमरीका सक्रिय था।

  1. बश्शार असद ने पूरे विश्वास और आग्रह के साथ कहा कि अमरीका ने ही दाइश का समर्थन किया और सीरिया से चोरी किया हुआ तेल तुर्की और इराक़ी कुर्दिस्तान के रास्ते बाहर स्मगल करने में उसने दाइश का हाथ बटाया। बश्शार असद ने यह भी कहा कि अमरीका ने पूर्वोत्तरी सीरिया के तेल और गैस से समृद्ध इलाक़े पर क़ब्ज़ा इसलिए नहीं किया कि उसे वहां मौजूद तेल और गैस की लालच या ज़रूरत है क्योंकि अमरीका तो ख़ुद रोज़ाना 12 मिलियन बैरल तेल पैदा कर रहा है, उसने इस इलाक़े पर इसलिए क़ब्ज़ा कर रखा है कि आने वाले समय में सीरिया सरकार से किसी भी बातचीत में इस मुद्दे को तुरुप के पत्ते के रूप में प्रयोग करे।
  2. बश्शार असद ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इदलिब को आतंकियों के नियंत्रण से आज़ाद कराने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा। इसमें विलंब इसलिए हो रहा है कि आम नागरिकों को यह मौक़ा मिल जाए कि वह उन इलाक़ों में आ जाएं जहां सीरियाई सरकार का नियंत्रण है। यह देखा जा रहा है कि अन्नुस्रा जैसे संगठन आम नागरिकों को इदलिब से बाहर निकलने से रोक रहे हैं क्योंकि उनको मानव ढाल के रूप में प्रयोग करना चाहते हैं।
  3. बश्शार असद को सीरिया के पुनरनिर्माण की प्रकिया तत्काल शुरू हो जाने की आशा नहीं है क्योंकि एक तरफ़ अमरीका ने प्रतिबंध लगा रखा है और दूसरी ओर अमरीकी सरकार इस देश की कंपनियों के साथ ही यूरोपीय कंपनियों को भी सीरिया में निवेश से रोक रही है और उन्हें भी प्रतिबंध लगा देने की धमकियां दे रही है। इसलिए पुनरनिर्माण का काम धीरे धीरे आगे बढ़ेगा और यह काम सीरियाई श्रमबल के सहारे अंजाम दिया जाएगा। बश्शार असद ने यह बात दो टूक स्वर में कही कि जो भी सरकार सीरिया जनता के ख़िलाफ़ सक्रिय रही है उसे सीरिया के पुनरनिर्माण की प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सबसे अधिक अवसर चीन, रूस और ईरान जैसे मित्र देशों को दिया जाएगा।

इस बात में तो कोई शक नहीं है कि ईरानी तेल और गैस पाइपलाइन का मुद्दा सीरिया संकट पर नज़र रखने वाले सभी टीकाकारों और लेखकों के ध्यान का केन्द्र बनेगा। इस विषय ने इलाक़े में सारे समीकरणों को बदल दिया और नए सिरे से समीकरणों की स्थापना की है।

सीरिया उस भयानक साज़िश का निशाना बना है जो अमरीका ने तैयार की थी और इस साज़िश के अलग अलग भाग अलग अलग देशों और संगठनों को सौंप दिए थे इनमें अरब भी शामिल थे और यूरोपीय भी शामिल थे। इस समय ईरान पर जो प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं और उसके ख़िलाफ़ लामबंदी की जो कोशिश की जा रही है वह सब राष्ट्रपति असद की बातों की पुष्टि करने वाली चीज़ें हैं क्योंकि जिस दिन ईरान की गैस और तेल पाइपलाइन भूमध्यसागर के तट पर पहुंचेगी उस दिन शक्ति और दौलत दोनों स्तरों पर फिर से नए समीकरण तैयार होंगे।

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