Nov १२, २०१९ १८:५२ Asia/Kolkata
  • एक से अधिक महिलाओं से शादी के बारे में वरिष्ठ नेता का फ़तवा/ ईश्वर एक, प्यार एक और यार भी एक

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली ख़ामेनई के कार्यालय ने बहुविवाह या किसी मुसलमान का एक ही समय में एक से अधिक महिलाओं से शादी करने के बारे में विचार (फ़तवा) का एलान किया है।

ईरान की फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के कार्यालय के हवाले से बहुविवाह के बारे में आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनई का फ़तवा बयान किया है।

इस्लाम में बहु विवाह का मुद्दा एक ऐसा मुद्दा है जो हमेशा चर्चा का विषय रहा है और महिला अधिकारों को लेकर इस पर काफ़ी हो हल्ला मचाया जाता है। इसलिए इसके बारे में इस्लाम के सही दृष्टिकोण की जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है।   

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के मुताबिक़, मान्य धार्मिक तर्कों के आधार पर मर्दों का एक से अधिका महिलाओं से विवाह (मुबाह) जायज़ है लेकिन (मुसतहब) प्रशंसनीय नहीं है। क़ुरान ने मर्दों के लिए बहु विवाह को केवल पत्नियों के बीच न्याय की शर्त के साथ जायज़ क़रार दिया है। इसलिए बुद्धिजीवियों की नज़र में अगर पत्नियों के बीच न्याय व अदालत बरक़रार नहीं कर सकने की संभावना हो तो पति के लिए दूसरी शादी करना जायज़ नहीं है।

इसके अलावा, सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक संस्था के रूप में परिवार के गठन, देखभाल और संरक्षण की ज़रूरत को देखते हुए ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता की नज़र में कुछ ज़रूरी क़दम उठाए जाने की ज़रूरत हैः जोड़ों का आपस में प्यार और आपसी विश्वास को बनाए रखना, मां और परवरिश करने वाली के रूप में महिलाओं की मुख्य भूमिका, महिलाओं की शिक्षा, परिवार में भौतिकवाद, दिखावे और भौतिक प्रतिस्पर्धा से बचना, विवाह को आसान और सादा बनाने के लिए प्रयास करना, जिसमें मां-बाप की भूमिका महत्वपूर्ण और प्रभावी हो, इसी तरह से सरकारी तंत्र और मीडिया की ज़िम्मेदारी है कि युवाओं के विवाह को आसान बनाने के लिए अपनी ज़िम्मेदारी निभाएं।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अगर बहुविवाह से परिवार के टूटने, बिखरने या उसे नुक़सान पहुंचने की संभावना हो तो वरिष्ठ नेता की नज़र इस बारे में सकारात्मक नहीं है, यही वजह है कि उन्होंने इस  अपने जुमले पर बल दिया हैः ईश्वर एक, प्यार एक और "यार" भी एक।

यहां हम क़ुराने मजीद के सूरए निसा की तीसरी आयत और उसका अनुवाद दे रहे हैं, जिसमें पुरुषों के लिए बहुविवाह के जायज़ होने और उसकी शर्त का उल्लेख किया गया हैः

 وَإِنْ خِفْتُمْ أَلَّا تُقْسِطُوا فِي الْيَتَامَىٰ فَانكِحُوا مَا طَابَ لَكُم مِّنَ النِّسَاءِ مَثْنَىٰ وَثُلَاثَ وَرُبَاعَ ۖ فَإِنْ خِفْتُمْ أَلَّا تَعْدِلُوا فَوَاحِدَةً...﴿٣

और अगर तुम्हें यतीम लड़कियों से विवाह करके उनके साथ इन्साफ़ नहीं कर सकने की चिंता हो तो अन्य महिलाओं में से जिसके साथ सहमति बने दो, तीन और चार के साथ निकाह कर लो, लेकिन अगर तुम्हें पत्नियों के बीच इन्साफ़ नहीं कर सकने का अंदेशा हो तो सिर्फ़ एक महिला से ही शादी करो... msm

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