Jan १७, २०२० ११:३१ Asia/Kolkata
  • ईरान असली शेर है, अमेरिका भी शेर है मगर कागज़ी

क्या आपने कभी सोचा कि अमेरिका ईरान पर हमला करने से क्यों पीछे हट गया, क्या कारण थे?

तीन जनवरी की रात थी जब अमेरिका ने बग़दाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाहर निकलने के बाद ईरान की इस्लामी क्रांति के संरक्षक बल सिपाहे पासदारान आईआरजीसी के जनरल क़ासिम सुलैमानी पर कायराना ड्रोन हमला करके शहीद कर दिया।

इस आतंकवादी हमले के बाद अमेरिका और उसके घटकों की युद्धोन्मादी टोलियों में खुशी का माहौल था परंतु उनमें से किसी को भी यह अपेक्षा नहीं थी कि उनकी यह खुशी क्षणिक है और वह शीघ्र ही शोक में बदलने वाली है।

जनरल कासिम सुलैमानी की शहादत के बाद वरिष्ठ नेता सहित ईरानी अधिकारियों ने बल देकर कहा था कि हम कड़ा बदला लेंगे परंतु अमेरिका अहं में डूबा था और यह सोच रहा था कि यह केवल धमकी है किन्तु ईरानी अधिकारियों की धमकी को देख कर वह समझ गया कि ईरान अपनी धमकी में गम्भीर है इसलिए अमेरिका के युद्धोन्मादी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान ने कोई हमला किया तो उसके 52 ठिकानों पर हम हमला करेंगे।

उन्होंने सोचा था कि ईरान को और हमलों की धमकी देकर डरा देंगे और वह अमेरिका के खिलाफ हमला करने से पीछे हट जायेगा परंतु ईरान ने जनरल क़ासिम सुलैमानी को दफ्न होने से पहले ही अपनी धमकी को अमली जामा पहना दिया और इराक में अमेरिका की सबसे बड़ी सैनिक छावनी ऐनुल असद पर मिसाइलों की बारिश कर दी।

इस हमले के घंटों बाद ट्रंप ने कहा कि ईरान के मिसाइली हमले में कोई अमेरिकी सैनिक नहीं मरा है। ईरान के जवाबी हमले के बाद अमेरिका को अपना अंजाम नज़र आने लगा इसलिए वह ईरान पर हमला करने से पीछे हट गया। 

सवाल यह नहीं है कि अमेरिकी सैनिक मरे या नहीं? बात यह है कि ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान ने कोई हमला किया या प्रतिक्रिया दिखाई तो हम ईरान के भीतर 52 ठिकानों को लक्ष्य बनायेंगे परंतु जब ईरान ने मिसाइलों से उसकी सैन्य छावनी पर मिसाइलों की वर्षा कर दी तो ट्रंप की भाषा और अंदाज़ ही बदल गया। उनका सारा अहं कहां चला गया।

कुछ जानकार हल्कों का मानना है कि ईरानी मिसाइलों की मारक क्षमता इतनी तेज़ थी कि ट्रंप की युद्धोन्मादी टोली को दिन में ही तारे नज़र आने लगे। ईरान के जवाबी हमले से पहले ट्रंप ने कहा था कि ईरान ने अब तक कोई जंग नहीं जीती है अब ट्रंप से पूछना चाहिये कि विजेता कौन है, यह जंग किसने किसी जीती है?

इसी प्रकार ट्रंप और उनकी युद्धोन्मादी टोली से यह पूछना चाहिये कि आखिर ऐनुल असद आधुनिकतम हथियारों से लैस छावनी है तो फिर ईरानी मिसाइलों को निष्क्रिय क्यों नहीं बनाया जा सका? हमले के कई दिनों तक उस छावनी के अंदर किसी को प्रवेश की अनुमति क्यों नहीं दी गयी?

द्वितीय विश्व के बाद यह पहला अवसर था जब किसी ने अमेरिका की सैनिक छावनी पर हमला किया था। ईरान ने अमेरिका की सैनिक छावनी पर हमला करके यह बता दिया कि ईंट का जवाब पत्थर से देंगे और ईरानी मिसाइलों के सामने ऐनुल असद छावनी मकड़ी के जाले से अधिक और कुछ नहीं है।

ईरान ने इस हमले से यह भी बता दिया कि मार कर भाग जाने का समय बीत गया है और अब ईरान की सीमा के अंदर हमला करना तो बहुत दूर की बात है तुम्हारे अहंकारी पर को हम देश के बाहर ही क़तर देंगे।

ईरान ने अमेरिका को ऐसा ज़ोरदार थप्पड़ जड़ा है कि अब न केवल वह बल्कि उसके बल पर कूदने वाले देशों और सरकारों ने भी दुम दबाकर चुप्पी साध ली है। अब कोई भी ईरान पर हमला करने की धमकी नहीं दे रहा है क्योंकि सबकी समझ में आ गया है कि ईरान ने अमेरिका पर हमला कर दिया तो हम किस खेत की मूली हैं!

अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के महानायक जनरल क़ासिम सुलैमानी को शहीद करके अपना असली चेहरा दिखा दिया है कि वह न केवल आतंकवाद से मुकाबला नहीं कर रहा है बल्कि आतंकवाद का जन्मदाता और अन्नदाता है। दूसरे शब्दों में अमेरिका आतंकवाद का जनक और अशांति का स्रोत है। MM

 

कमेंट्स