Feb १५, २०२० ११:२४ Asia/Kolkata
  • ट्रंप के अहंकारी रवइये के कारण हम जंग के मुहाने पर पहुंच गये थे, अब मोम्पियो ही बतायेंगे कि उन्होंने ईरान के नाम पत्र में क्या लिखा थाः   जवाद ज़रीफ़

विदेशमंत्री ने कहा कि ईरान का जवाब पोम्पियो की भांति अशिष्टाचारिक नहीं था और पहले दोनों देशों के मध्य संपर्क की सतह इतनी बुरी नहीं थी।

विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ़ ने कहा है कि अमेरिका के आतंकवादी हमले में जनरल क़ासिम सुलैमानी की शहादत के बाद तेहरान और वाशिंग्टन के मध्य क्रोध से भरे पत्रों का आदान- प्रदान हुआ था। उन्होंने म्यूनिख़ सुरक्षा कांफ्रेन्स में एनबीसी न्यूज़ चैनल से साक्षात्कार में कहा कि दोनों पक्ष युद्ध के मुहाने पर पहुंच गये थे और जनवरी में होने वाली घटना के बाद से दोनों देशों के संबंध तनावग्रस्त हैं।

साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान के संबंध में ग़लत जानकारी के कारण टोनाल्ड ट्रंप की भर्त्सना की जानी चाहिये और खेद की बात है कि ट्रंप की ग़लत सूचना, अज्ञानता और अहंकार ने क्षेत्र को युद्ध के निकट कर दिया।

विदेशमंत्री ने कहा कि जनरल क़ासिम सुलैमानी की शहादत के बाद अमेरिका के विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने बहुत ही अनुचित, अशिष्ट और धमकी से भरा पत्र ईरान को भेजा था और तेहरान ने भी उसका कड़ा जवाब दिया।

अलबत्ता विदेशमंत्री ने यह नहीं बताया कि उस पत्र में क्या था। उन्होंने कहा कि छोड़ियो पोम्पियो बतायेंगे कि उस पत्र में उन्होंने क्या लिखा था। विदेशमंत्री ने कहा कि ईरान का जवाब पोम्पियो की भांति अशिष्टाचारिक नहीं था और पहले दोनों देशों के मध्य संपर्क की सतह इतनी बुरी नहीं थी।

एनबीसी न्यूज के अनुसार अमेरिकी विदेशमंत्रालय ने अभी तक विदेशमंत्री ज़रीफ़ की बातों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई है। विदेशमंत्री ने संकट आरंभ करने के कारण अमेरिकी सरकार की निंदा की और कहा कि उससे पीछे हटने की शर्त यह है कि अमेरिकी सरकार उससे पीछे हट जाये।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ग़लत समय पर और ग़लत चोट मारी और यह उसका परिणाम है और हम उसे नियंत्रित नहीं कर सकते और अमेरिका भी उसे नियंत्रित नहीं कर सकता। मेरा कहने का तात्पर्य यह है कि जो इस कार्य के ज़िम्मेदार हैं वे इसके परिणाम भुगत रह हैं और मेरे मानना है कि जिन्होंने इसका आरंभ किया है उन्हें पीछे हटना चाहिये।

विदेशमंत्री ने इराक़ी और लेबनानी गुटों को तेहरान द्वारा नियंत्रित करने पर आधारित अमेरिकी दावे का खंडन किया और बल देकर कहा कि जनरल क़ासिम सुलैमानी शहीद होने से पहले इराक में मौजूद तनावों को कम करने और इराक के सशस्त्र गुटों को अमेरिका के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही से रोकने के प्रयास में थे।

विदेशमंत्री ने कहा कि शहीद सुलैमानी हर व्यक्ति के खिलाफ़ सैनिक कार्यवाही के खिलाफ थे। यह उनका कार्य था यह वह कार्य था जिसे वह अंजाम देने के लिए प्रयास करते थे वह स्थिति को नियंत्रित करना चाहते थे। MM

 

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