Feb १५, २०२० ११:३२ Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? इस प्रकार के कटाक्षों को सहन कीजिए और इस बात की आशा न रखिए कि ईश्वर उन्हें तत्काल दंडित कर देगा।

मनोबल के लिए आवश्यक है कि दिन रात के कुछ निर्धारित भागों में ईश्वर की उपासना और प्रार्थना करें।

सूरए ताहा की आयत क्रमांक 130वीं का अनुवादः

तो (हे पैग़म्बर!) जो कुछ वे कहते है उस पर धैर्य से काम लीजिए और सूर्योदय से पहले और सूर्य के डूबने से पहले अपने पालनहार का गुणगान कीजिए और रात की घड़ियों में भी तथा दिन के कुछ समय में भी ईश्वर का गुणगान कीजिए ताकि आप प्रसन्न हो जाएं।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

विरोधियों का व्यवहार पैग़म्बरी और दायित्व के निर्वाह में आपको तनिक भी प्रभावित नहीं करेगा और आप निराश नहीं होंगे बल्कि ईश्वर की दया व कृपा के प्रति अधिक आशावान हो कर अपने भारी दायित्व के निर्वाह की ओर से प्रसन्न रहेंगे।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. ईमान वाले लोगों को विरोधियों की बातों और व्यवहार के संबंध में दृढ़ रहना चाहिए और अपने दायित्वों के पालन की ओर से ढिलाई नहीं करनी चाहिए।

  2. नमाज़ पढ़ना तथा ईश्वर का गुणगान करना, शत्रुओं की हठधर्मी और कुप्रचारों के मुक़ाबले में भावनाओं के सुदृढ़ होने का कारण है।

  3. रात केवल आराम और सोने के लिए नहीं है बल्कि उसका एक भाग, नमाज़ और ईश्वर से प्रार्थना के लिए विशेष करना चाहिए।

     

     

 

टैग्स

कमेंट्स