Feb १८, २०२० १३:०३ Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? हठधर्मी व घमंडी लोग, मौजूद स्पष्ट तर्कों को स्वीकार नहीं करते और अन्य तर्कों की मांग करते रहते हैं।

ये लोग चमत्कार की मांग क्यों करते हैं और बहाने क्यों बनाते हैं क्या यह क़ुरआन इनके लिए पर्याप्त नहीं है जो इतनी विशिष्टताओं का स्वामी है और पिछली आसमानी किताबों में जो बातें वर्णित हैं उनका उल्लेख करता है।

सूरए ताहा की आयत क्रमांक 133 का अनुवादः

और उन्होंने कहा कि पैग़म्बर अपने पालनहार की ओर से हमारे पास कोई निशानी या चमत्कार क्यों नहीं लाते? क्या उनके पास पिछली (आसमानी) पुस्तकों में वर्णित तथ्यों का उल्लेख करने वाला (क़ुरआन) नहीं आया है?

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

जब मनुष्य में सत्य को स्वीकार करने की भावना ही न हो तो वह न तो क़ुरआने मजीद को स्वीकार करता है और न ही हज़रत मूसा की लाठी को।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. हठधर्मी व घमंडी लोग, मौजूद स्पष्ट तर्कों को स्वीकार नहीं करते और अन्य तर्कों की मांग करते रहते हैं।
  2. जब मनुष्य में सत्य को स्वीकार करने की भावना ही न हो तो वह न तो क़ुरआने मजीद को स्वीकार करता है और न ही हज़रत मूसा की लाठी को।

     

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