Feb २१, २०२० १८:०१ Asia/Kolkata

अमरीका ने डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में ईरान पर अधिकतम दबाव की नीति अपना रखी है और इसी लिए वह जेसीपीओए से भी बाहर निकल गया।

अमरीका ने ईरान पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगा रखे हैं जिनमें से ताज़ा प्रतिबंध ईरान की संविधान निरीक्षक परिषद पर लगाया गया है। यह काम, ईरान में 11वें संसदीय चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया गया है क्योंकि अमरीका ने यह नया प्रतिबंध, ईरान में मतदान आरंभ होने से कुछ घंटों पहले लगाया। अमरीका के प्रतिबंधों की लिस्ट में ईरान की निरीक्षक परिषद के पांच सदस्यों का नाम बढ़ा लिया गया है और इसके लिए प्रत्याशियों की योग्यता की जांच की प्रक्रिया को बहाना बताया है। अमरीका ने संसदीय चुनाव के प्रत्याशियों की योग्यता परखने की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए हालिया सप्ताहों में निरीक्षक परिषद के खिलाफ जम कर प्रोपगंडा किया। सवाल यह है कि अमरीका को यह अधिकार किसने दिया कि वह इस प्रकार के अन्य देशों के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप करे और चुनाव में प्रत्याशियों के कागज़ात जमा करने न करने जैसे मामलों में भी अपना विचार रखे और फैसला करे?  अमरीका का मक़सद, ईरान में मतदान में लोगों की उपस्थिति को कम करना था जो पूरा नहीं हुआ और शुक्रवार को ईरान में संसदीय चुनाव में जनता ने भारी संख्या में भाग लिया। अमरीका अन्य देशों के चुनाव के बारे में तो सवाल उठाता है लेकिन स्वंय अमरीका के भीतर चुनावी प्रक्रिया पर किसी देश को बोलने की अनुमति नहीं देता। अमरीका में चुनाव प्रक्रिया इतनी विवादित है कि कई बार मामला अदालत तक गया और जांच समिति तक गठित की गयी। 

अमरीका वास्तव में ईरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध का दायरा फैला रहा है अमरीका को आशा है कि ईरान को आर्थिक दबाव डाल कर कमज़ोर किया जा सकता है हालांकि अनुभव ने इस विचार को गलत सिद्ध किया है। 

ट्रम्प सहित अमरीकी अधिकारी, एक तरफ तो ईरान पर भारी दबाव डाल कर उसे कमज़ोर करने का दावा करते हैं और दूसरी तरफ ईरानी जनता से हमदर्दी भी प्रकट करते हैं और ट्रम्प ने तो फार्सी में ट्वीट करके ईरान में विमान दुर्घटना के समय ईरानी जनता के साथ खड़े होने का हास्यास्पद दावा किया था। ट्रम्प भी  अमरीका के अन्य राष्ट्रपतियों की भांति ईरान को कमज़ोर करने का सपना संजोए अपने अंजाम को पहुंच जाएंगे। 

टैग्स

कमेंट्स