Feb २२, २०२० १८:२२ Asia/Kolkata
  • ईरान में संसदीय चुनाव, राजनैतिक व सामाजिक मंच के फ़ैसलों में जनता की भागीदारी का प्रतीक

ईरान में शुक्रवार 21 फ़रवरी को संसदीय चुनाव हुआ। इस चुनाव के लिए मतदान के साथ साथ इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता का चयन करने वाली विशेषज्ञ परिषद के लिए कुछ जगहों पर उपचुनाव हुए। 

चुनाव का आयोजन और जनता की राय को आधार क़रार देना इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था के कारनामों में है। ईरान में चुनाव राजनैतिक व सामाजिक मंचों पर फ़ैसलों में जनता की भागीदारी का प्रतीक है जो एक मूल्यवान कर्तव्य के साथ साथ क़ानूनी अधिकार भी है। इस आधार पर इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था लोगों के चयन से वजूद में आयी और लोगों की राय को ईरान के संविधान में प्रजातंत्र के स्तंभ के रूप में अहमियत दी गयी।
ईरान में ग्यारवहें संसदीय चुनाव में 7 हज़ार से ज़्यादा उम्मीदवार मैदान में थे जिनमें 290 उम्मीदवार जीत कर संसद में पहुंचेंगे। 
मतदान ख़त्म होने के बाद, मतों को गिनने का काम शुक्रवार रात से ही शुरु हो गया। हर चुनावी क्षेत्र के नतीजा का अलग एलान होगा। अगर किसी चुनावी क्षेत्र के उम्मीदवार कम से कम 20 फ़ीसद मतदान हासिल न कर पाये तो वहां पर दूसरे चरण का मतदान होगा। 
चुनाव की राजनैतिक, सामाजिक व आर्थिक उपयोगिता है। यही वजह है कि दुश्मन चुनाव में जनता की भागीदारी को कम करने के लिए हर तरह का हथकंडा अपनाता है और इस बार भी उसने ऐसा ही किया। अब यह चीज़ ईरानी राष्ट्र के लिए नयी बात नहीं रह गयी है। लोग समझ चुके हैं कि दुश्मन चुनाव की आड़ में कई लक्ष्य साधना चाहता है जिसमें सबसे बड़ा लक्ष्य जनता के मनोबल को कमज़ोर करना है, लेकिन वह अपने लक्ष्य में सफल नहीं हो पाया है, क्योंकि जनता ने मतदान केन्द्रों पर जाकर दुश्मन से यह मौक़ा छीन लिया है। 
जैसा कि इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने हालिया चुनाव में बल दिया कि अमरीकियों ने इन 40 साल में इस्लामी व्यवस्था को गिराने के लिए राजनीति, अर्थव्यवस्था, संस्कृति, सुरक्षा, रणनीति और मीडिया के क्षेत्र में हर तरह के हथकंडे अपनाए, लेकिन इस्लामी व्यवस्था न सिर्फ़ यह कि गिरी नहीं बल्कि पहले से ज़्यादा अमरीका के मुक़ाबले में शक्तिशाली हुयी है। 
संसद के चुनावी अधिकार के मद्देनज़र, उम्मीदवारों में सबसे योग्य का चयन, दुश्मन के ख़तरों व दबावों से निपटने में ईरान के अधिक शक्तिशाली होने और मुश्किलों से पार पाने के लिए अपनाए गए उपायों व कोशिशों को रफ़्तार देने में प्रभावी होगा। इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था में हर चुनाव का भविष्य जनता तय करती है। इस तरह चुनाव का परिणाम जनता की राय का अधीन है। अब इस चुनाव के अंतिम परिणाम के सामने आने का इंतेज़ार है जिससे ग्यारहवीं संसद के संयोग का पता चलेगा।  (MAQ/T)
 

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