Mar २२, २०२० १९:२७ Asia/Kolkata
  • घातक बीमारियां आसान इलाजः मोटापे से बचने का सबसे अहम तरीक़ा यह है कि पेट भर का खाना न खाएं!

मोटापे के पारंपरिक इलाज के तरीक़े पर उस्ताद हुसैन ख़ैर अंदीश के विचारः  आज कल मोटापा एक बड़ी समस्या बन चुका है। मोटापे से बचने का सबसे अहम तरीक़ा यह है कि पेट भर का खाना न खाएं।

इसी तरह खाने के बीच में पानी न पीएं, ख़ास तौर पर ठंडा पानी न पिएं। कोल्ड ड्रिंक की तो बात ही छोड़िए। उसे तो पीना ही नहीं चाहिए। यह उन मोटे लोगों का इलाज है जिनमें मोटापे की वजह चर्बी है। जो लोग मांसपेशी और चर्बी दोनों की वजह से मोटे होते हैं, उनका इलाज थोड़ा कठिन है। इस तरह के मोटापे का शिकार लोगों को चाहिए कि दोपहर का खाना न खाएं। सुबह का नाश्ता करें और रात का खाना वक़्त पर खाएं।

खाने का यह उसूल एक हफ़्ते कठिन लगेगा लेकिन जब आदत पड़ जाएगी तो बहुत अच्छा लगेगा। बिल्कुल रोज़ा रखने की तरह है कि पहला दिन कठिन होता है लेकिन जब आदत पड़ जाती है तो व्यक्ति आसानी से रोज़ा रखता है। यह मेरा अपना अनुभव है। पहले मुझे लगता था कि यह उसूल उनके लिए सही है जो लोग काम नहीं करते और जो लोग अधिक काम करते हैं उनके लिए दोपहर का खाना ठीक रहेगा।

पूर्व राष्ट्रपति डाक्टर अहमदीनेजाद की सरकार के लगभग 30 बड़े अधिकारी मेरी क्लीनिक आए थे। उन्होंने बतायाः जबसे हमने दोपहर का खाना छोड़ा है हममें काम करने की क्षमता बढ़ गयी है। जब हम दोपहर का खाना खाते थे तो दोपहर के बाद की बैठकों का नतीजा अच्छा नहीं रहता था। हम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाते थे। क्योंकि जब पेट भरा होता है तो दिमाग़ सही काम नहीं करता। जबसे दोपहर का खाना छोड़ा है काम करने की क्षमता बढ़ गयी है।

डाक्टर ख़ैर अंदीश कहते हैं कि एक बार मैं ख़ुद राष्ट्रपति अहमदी नेजाद के एक मंत्री के साथ प्रांतीय दौरे पर गया था। वह जेहादे केशावर्ज़ी के मंत्री श्रीमान इस्कंदरी थे। वह सुबह छह बजे उठे और रात 2 बजे तक उन्होंने काम किया। मैंने उनसे पूछा कि आपके पास इतनी एनर्जी कहां से आती है तो उन्होंने कहा मेरे पास इतनी एनर्जी रहती है। तब मैंने उनसे उनके खान पान के उसूल के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वह बीस साल से दोपहर का खाना नहीं खा रहे हैं।

इसी तरह एक और शख़्सियत हैं उनकी उम्र अस्सी साल है और वह सर्जन हैं। मैंने उनसे सवाल किया है इतनी उम्र में आप के पास इतनी एनर्जी कहां से है। उन्होंने भी कहा कि वह बीस साल से दोपहर का खाना नहीं खा रहे हैं। इसलिए जो लोग यह कहते हैं कि अगर दोपहर का खाना न खाएं तो काम नहीं कर सकते, वे ग़लत कहते हैं।

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