Apr ०९, २०२० १३:०६ Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? मनुष्य को दिन-रात के हर भाग में निरंतर ईश्वर को याद करते रहना चाहिए।

मनुष्य को अपने घेरे में लेने वाले विभिन्न कारकों से संघर्ष के लिए इसके अलावा और कोई मार्ग नहीं है कि हम सदैव ईश्वर की याद में रहें।

सूरए अहज़ाब की आयत क्रमांक 41 और 42 का अनुवादः

हे ईमान वालो! ईश्वर को बहुत अधिक याद करो। और प्रातःकाल और संध्या के समय उसका गुणगान करते रहो।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

हर स्थिति में ईश्वर की याद हमें इस बात के लिए प्रेरित करती है कि हम उसकी अनुकंपाओं पर कृतज्ञ रहें, समस्याएं व कठिनाइयां आने पर धैर्य व संयम से काम लें, पाप का सामना होने पर ईश्वर से डरें और पाप कर देने पर ईश्वर से क्षमा चाहें और तौबा करके उसकी ओर लौट आएं।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. ईश्वर की याद केवल शाब्दिक नहीं होती बल्कि मनुष्य को अपनी हर सोच और हर काम में ईश्वर की प्रसन्नता को दृष्टिगत रखना चाहिए।

  2. ईश्वर की याद उसी समय मनुष्य के लिए प्रभावी व निर्माणकारी होगी जब वह मौसमी व अस्थायी नहीं बल्कि निरंतर व स्थायी होगी।

  3. ईश्वर की याद उसी समय मनुष्य के लिए प्रभावी व निर्माणकारी होगी जब वह मौसमी व अस्थायी नहीं बल्कि निरंतर व स्थायी होगी।

     

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