May १७, २०२० १६:०४ Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? गिनती, संख्या और हिसाब की मानव जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

सूर्य के प्रकाश और ऊष्मा के कारण ही धरती पर रहने वालों का अस्तित्व है जबकि चंद्रमा का सुन्दर प्रकाश रात में लोगों का मार्गदर्शन करता है।

सूरए यूनुस की आयत क्रमांक पांच और छह का अनुवादः

वही है जिसने सूर्य और चंद्रमा को प्रकाशमान बनाया और चंद्रमा (के घटने बढ़ने) की मंज़िलें ठहराईं ताकि तुम (उसके माध्यम से) वर्षों की संख्या और हिसाब जान सको। ईश्वर ने इन सबकी, सत्य के साथ ही सृष्टि की है और वो जानने वालों के लिए अपनी निशानियों को स्पष्ट रूप से वर्णन करता है। निश्चित रूप से रात और दिन के आने जाने में से और जिन वस्तुओं की ईश्वर ने आकाशों और धरती में रचना की है, उनमें ईश्वर से डरने वालों के लिए बड़ी निशानियां हैं।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

रात और दिन की इसी आवाजाही में कि जो बहुत साधारण प्रतीत होती है, सत्य की खोज में रहने वाले पवित्र हृदय के लोगों के लिए ईश्वर की शक्ति व तत्वदर्शिता की अनेक निशानियां हैं।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. गिनती, संख्या और हिसाब की मानव जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका है और क़ुरआने मजीद, सूर्य और चंद्रमा के आधार पर दिनों, महीनों और वर्षों की गिनती को इसका एक उदाहरण बताता है।
  2. प्रकृति पर, चाहे वो हमारी दृष्टि में महत्त्वहीन ही क्यों न हो, विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि प्रकृति ईश्वर के सौन्दर्य का दर्पण है।

     

टैग्स

कमेंट्स