May २६, २०२० १२:१३ Asia/Kolkata
  • ईरान पर अमरीकी-इस्राईली हमले को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स का बड़ा ख़ुलासा, 30,000 पाउंड के बम से परमाणु प्रतिष्ठानों को उड़ाने की थी तैयारी

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमरीका के पर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासनकाल में ईरान पर अमरीकी हमले की तौयारियों का ख़ुलासा किया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया है कि उसे ऐसे दस्तावेज़ हासिल हुए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि ओबामा ने ईरान पर हमले की तैयारी कर ली थी। यहां तक कि हमले के परीक्षण के लिए अमरीका के पश्चिम में स्थित रेगिस्तानी इलाक़े में ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों के आकार के डेमो भी तैयार किए गए थे।

अमरीकी अख़बार की यह रिपोर्ट अमरीका, इस्राईल और यूरोप के दर्जनों अधिकारियों के साथ बातचीत और बयानों पर आधारित है, जिसमें 2012 में ईरान पर इस्राईल के हमले की योजना से पर्दा उठाया गया है।

2012 में ईरान पर इस्राईल के हमले की इतनी अधिक संभावना थी कि अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा ने युद्ध शुरू होने की स्थिति में अमरीका की भूमिका के लिए तैयारी शुरू कर दी थी।

अमरीकी सेना ने देश के पश्चिमी क्षेत्र में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों के आकार के डेमो तैयार किए थे, ताकि युद्ध अभ्यास के दौरान उन्हें 30,000 पाउंड के बम से नष्ट किया जा सके। अमरीका की ईरान की जासूरी करने वाले इस्राईल की गतिविधियों पर भी पूरी नज़र थी। इस्राईली जासूसी ड्रोन, जो आज़रबाइजान की सीमा से ईरान में घुसे थे, अमरीकी उपग्रह उनकी भी तस्वीरें उतार रहे थे।

इस रिपोर्ट के दूसरे भाग में इस्राईली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतनयाहू द्वारा अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प को ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से बाहर निकलने पर मजबूर करने के लिए उठाए गए उन क़दमों का भी ख़ुलासा है, जो अभी सार्वजनिक नहीं हुए थे।

न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा है कि 2018 में परमाणु समझौते से निकलने की ट्रम्प की घोषणा और उसके बाद घटने वाली घटनाओं से एक बार फिर ईरान पर इस्राईल के हमले को लेकर वाशिंगटन द्वारा हरी झंडी दिखाए जाने की संभावना प्रबल हो गई थी।

हालांकि अमरीकी और इस्राईली अधिकारियों ने ईरान पर किसी भी स्तर के हमले की स्थिति में तेहरान की जवाबी कार्यवाही का आंकलन किया तो वे ईरान पर हमले की योजना को आगे बढ़ाने का साहस नहीं दिखा सके।

ईरान और क्षेत्र में उसके सहयोगी अमरीकी सैनिकों को निशाना बना सकते थे, फ़ार्स खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ में तेल टैंकरों के निशाना बनने की स्थिति में तेल की क़ीमतों में आग लग जाती, इस्राईल पर हिज़्बुल्लाह के हमले शुरू हो जाते, पश्चिम पर साइबर हमले होते और अमरीका क्षेत्र में अधिक सैनिक भेजने पर मजबूर हो जाता।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प प्रशासन की नीतियां ओबामा की नीतियों से बहुत अलग हैं। ओबामा का प्रयास था कि किसी भी तरह ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकें, लेकिन इसी के साथ वह ईरान को उसके वर्तमान वास्तविक रूप में स्वीकार करने के लिए पूरी तरह से तैयार थे।

ओबामा प्रशासन के एक अधिकारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स से बात करते हुए कहा था कि हमने फ़ैसला कर लिया था कि ईरान जैसा है, वैसा ही उसे स्वीकार करके उसके साथ समझौता कर लें, न कि जैसा हम चाहते हैं।

हालांकि ट्रम्प, नेतनयाहू के लहजे में बात करते हैं और वह ईरान को इस्राईल के चश्मे से देखते हैं। यही कारण हैं कि ईरान को लेकर ट्रम्प की नीतियों में बड़ा झोल है और वे कई बार ईरान के मुक़ाबले में मुंह की खा चुके हैं। msm

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