Jun ०२, २०२० १२:५६ Asia/Kolkata
  • फ़ार्स खाड़ी का जवाब लैटिन अमरीका में, ईरान ने अमरीका को उसकी गर्दन से पकड़ लिया है

जैस ही पश्चिमी गोलार्ध में ईरान के प्रभाव की यादें अमरीकी अधिकारियों के दिमाग़ में पुरानी पड़ने लगीं, अप्रैल के अंत में ईरानी विमानों ने वेनेज़ुएला के हवाई अड्डों पर लैंडिंग शुरू कर दी।

ईरान ने वेनेज़एला की जर्जर पड़ी रिफ़ाइनरियों में जान डालने के साथ ही अमरीकी प्रतिबंधों के कारण ऊर्जा संकट का सामना कर रहे इस लैटिन अमरीकी देश को तेल की आपूर्ति शुरू कर दी।

ईरान ने रिफ़ाइनरियों के लिए कल पुर्ज़ों के साथ ही प्रशिक्षण का भी बंदोबस्त किया, ताकि वाशिंगटन की वर्चस्ववादी नीतियों के मुक़ाबले में काराकास का प्रतिरोध कमज़ोर न पड़ सके।

तेहरान ने यह साबित कर दिया है कि अगर अमरीका हज़ारों मील दूर फ़ार्स खाड़ी और पश्चिम एशिया के क्षेत्र में ग़ुंडागर्दी कर सकता है, तो ईरान उसका जवाब उसके आंगन में अपनी पैठ बनाकर दे सकता है।

एक समय था, जब अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के राष्ट्रीय सुरक्षा के सलाहकार जॉन बोल्टन ने ईरान और रूस को धमकी देते हुए कहा था कि वह वेनेज़ुएल से निकल जाएं, क्योंकि वेनेज़ुएला अमरीका का आंगन है और वाशिंगटन यह बात क़तई बर्दाश्त नहीं करेगा कि उसके दुश्मन उसके आंगन में आकर अपनी सक्रियता दिखाएं।

बात जब लैटिन अमरीका में ईरान के प्रभाव की आती है तो अमरीकी अधिकारी यह भूल जाते हैं कि इस क्षेत्र में ईरान के प्रभाव का एक लम्बा इतिहास है। वेनेज़ुएला से उसके रिश्तों का इतिहास 1960 से शुरू होता है, जब दोनों देश ओपेक के संस्थापक सदस्य बने थे।

1979 में इस्लामी क्रांति की सफलता और अमरीका के पिट्ठू ईरानी शाह के पतन के बाद, ईरान ने क्यूबा और निकारागुआ के साथ मज़बूत रिश्ते क़ायम किए और अमरीकी साम्राज्य के प्रभाव का रंग फीका किया। 1998 में लौहपुरुष माने जाने वाले ह्यूगो शावेज़ के वेनेज़ुएला का राष्ट्रपति चुने जाने के बाद, काराकास ने तेहरान के साथ व्यापक सहयोग के लिए अपने दरवाज़े खोल दिए और बोलीविया तथा इक्वाडोर के साथ ईरान के रिश्तों को मज़बूत बनाने में मदद की।

ईरान ने अमरीका को उसी की दहलीज़ पर मात देने के अपने विकल्प यहीं तक सीमित नहीं रखे, बल्कि क्यूबा के साथ आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग में ख़ूब विस्तार किया।

ईरान ने लैटिन अमरीकी देशों की जनता तक पहुंच बनाने के लिए हिस्पैन टीवी लॉन्च किया, जो इस क्षेत्र में अमरीकी दुष्प्रचार का मुक़ाबला करता है।

दक्षिण अमरीकी देशों के साथ ईरान के यह संबंध, लैटिन अमरीका में तेहरान के प्रभाव को दर्शाते हैं, जो अमरीकी प्रभाव का मुक़ाबला करने के लिए पर्याप्त हैं।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान, वाशिंगटन ने काराकास में सत्ता वरिवर्तन के लिए छक्के छुड़ा लिए,  लेकिन वह निकोलस मादुरो की सरकार को नहीं हिला पाया है। मादुरो को ईरान और रूस का व्यापक समर्थन हासिल है, जो अमरीकियों को अपनी आंख में सबसे ज़्यादा खटकता है।

इसमें कोई शक नहीं है कि जब तक व्हाइट हाउस को उसकी नीतियों का मुंह तोड़ जवाब नहीं दिया जाएगा, वह दुनिया भर के देशों के आंतरिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप जारी रखेगा, ख़ास तौर से फ़ार्स खाड़ी से वह नहीं निकलेगा। हां जब अमरीका को इस क्षेत्र में और उसके आंगन में एक साथ चोट पहुंचेगी तो वह अपने पर ज़रूर समेटेगा और फिर उतने ही पैर फैलाएगा, जितनी उसकी औक़ात है। msm

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