Jun ०३, २०२० १३:०७ Asia/Kolkata
  • इमाम ख़ुमैनी की 31वीं बरसी पर इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता की श्रद्धांजलि, कहा: इमाम ख़ुमैनी आज भी हमारे बीच ज़िंदा हैं

3 जून को ईरानी जनता ईरान की इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी के स्वर्गवास की 31वीं बरसी मना रही है।

आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद रूहुल्लाह मूसवी ख़ुमैनी का निधन कि जिन्हें इमाम ख़ुमैनी के रूप में जाना जाता है, 3 जून 1989 को 87 वर्ष की आयु में तेहरान में हुआ था।

साम्राज्यवाद-विरोधी प्रतीक के रूप में इमाम ख़ुमैनी ने अमरीका के पिट्ठू ईरानी शाह के शासन के ख़िलाफ़ प्रतिरोध करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था और आख़िरकार 1979 में शाही शासन का अंत करके उन्होंने इस्लामी क्रांति की सफलता की बुनियाद रखी।

इस्लामी क्रांति के संस्थापक ने इराक़, तुर्की और फ़्रांस में निर्वासन में कई साल गुज़ारे, लेकिन जहां भी रहे वहीं से ज़मीनी स्तर पर साम्राज्यवाद विरोधी आंदोलन का नेतृत्व किया और अंततः ईरान में अत्याचारी राजशाही शासन को उखाड़ फेंका।

इमाम ख़ुमैनी के उत्तराधिकारी ईरान की इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली ख़ामेनई ने टीवी पर सीधे प्रसारित होने वाले राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इमाम ख़ुमैनी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि इमाम ख़ुमैनी आज भी हमारे बीच जीवित हैं, उन्हें इसी तरह से ज़िंदा रखना चाहिए और हमें उनसे लाभान्वित होते रहना चाहिए।

उन्होंने कहाः इमाम ख़ुमैनी परिवर्तन पसंद करते थे और परिवर्तन के निर्माता भी थे। क्रांति के क्षेत्र में उनकी भूमिका किसी अभियान के कमांडर और वास्तविक मार्गदर्शक की थी।

इमाम ख़ुमैनी की बरसी के अवसर पर हर साल पूरे ईरान और विशेष रूप से तेहरान स्थित इमाम ख़ुमैनी के मक़बरे में शोक सभा का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश और दुनिया से बड़ी संख्या में गणमान्य हस्तियां शामिल होती हैं। पारम्परिक रूप से इस शोक सभा को इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता संबोधित करते हैं।

लेकिन इस वर्ष कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप पर रोकथाम के लिए किए गए उपायों का पालन करते हुए इस समारोह को रद्द करना पड़ा और इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने टीवी पर राष्ट्र को संबोधित किया और इमाम ख़ुमैनी को श्रद्धांजलि अर्पित की। msm

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