Jul ०७, २०२० १८:५२ Asia/Kolkata
  • क्या अमरीका और इस्राईल, ईरान के नतंज़ परमाणु प्रतिष्ठान पर हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार करने का साहस करेंगे?

अगर नतंज़ परमाणु प्रतिष्ठान में घटने वाली हालिया घटना में इस्राईल की भूमिका साबित हो जाती है तो ईरान की रेड लाइन को पार करने का जोखिम उठाने में अमरीका की भूमिका को भी नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता।

शुक्रवार को घटने वाली इस घटना के बाद से ही इस्राईली और पश्चिमी मीडिया, इसे इस्राईल की शक्ति के प्रतीक के रूप में दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं।

इसके लिए बड़े पैमाने पर प्रोपैगंडा किया जा रहा है और निराधार दावे किए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर परमाणु प्रतिष्ठान में कितना नुक़सान हुआ, हवाई हमला किया गया, साइबर हमला किया गया यहां तक कि लेज़र हथियार का प्रयोग किया। हालांकि इस तरह के दावों के लिए किसी भी तरह का कोई प्रमाण पेश नहीं किया जा रहा है। इससे पता चलता है कि इस प्रोपैगंडे का मक़सद ईरान की सुरक्षा को कमज़ोर करके पेश करना और इस्राईल की एक शक्तिशाली छवि गढ़ना है।

इस घटना के बारे में इस्राईली अधिकारियों विशेष रूप से प्रधान मंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री की ख़ामोश प्रतिक्रिया भी इसी प्रोपैगंडे का एक भाग है।

वास्तव में इस्राईली अधिकारी ईरान की मुंहतोड़ जवाबी कार्यवाही की क्षमता से अच्छी तरह अवगत हैं और यही वजह है कि वे इस बारे में खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। इतने संवेदनशील मुद्दे पर सिर्फ़ ख़ामोश रहकर वे इसका श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं।

इस्राईली मीडिया के इन दावों को अगर सच्चा भी मान लिया जाए कि नतंज़ घटना में ज़ायोनी शासन का हाथ था, तो इसका मतलब है कि इस्राईल की रणनीति में बदलाव हुआ है।

इसलिए कि इस तरह से इस्राईल ने रेड लाइन पार करके प्रतिबंधित क्षेत्र में क़दम रखने का ख़तरा मोल लिया है। ईरान और विश्व समुदाय पर पड़ने वाले इस क़दम के प्रभावों के नतीजे में इन दोनों मोर्चों के बीच लड़ाई के पुराने नियम बदल जायेंगे।

दूसरे यह भी स्पष्ट है कि इस्राईल इस तरह का ख़तरनाक क़दम अमरीका की सहमति के बग़ैर नहीं उठाएगा। इसलिए अगर इस अटकलबाज़ी को सही माना जाए कि इस घटना के पीछे इस्राईल का हाथ हो सकता है, तो निश्चित रूप से या अमरीका ने उसे ऐसा करने का आदेश दिया है या उसका भरपूर समर्थन किया है।

ऐसी स्थिति में अमरीका को भी ईरान की जवाबी कार्यवाही के लिए तैयार रहना होगा।

इसलिए मीडिया के प्रोपैगंडे से हटकर ऐसी संभावना कम ही है कि अमरीका और इस्राईल इस क़दम के भयानक परिणामों को नज़र अंदाज़ करते हुए ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों के ख़िलाफ़ कोई मूर्खतापूर्ण क़दम उठायेंगे। msm

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