Jul १२, २०२० १०:३९ Asia/Kolkata
  • ईरान और चीन के बीच 25 वर्षीय समझौता समीकरणों को बदल देने वाला क़दम है, अमरीका होश में न आया तो सब कुछ गवां देगाः न्यूयार्क टाइम्ज़ का विशलेषण

अमरीका के अख़बार न्यूयार्क टाइम्ज़ ने एक लेख में ईरान और चीन के बीच होने वाले स्ट्रैटेजिक सहयोग के समझौते का जायज़ा लिया है। फ़रनाज़ फ़सीही और स्टीवन ली मायर्ज़ द्वारा लिखे गए इस लेख में समझौते को निर्णायक क़दम बताया गया है जो पूरे पश्चिमी एशिया पर अपना असर डालेगा।  

लेख के अनुसार ईरान और चीन ने ख़ामोशी से बहुत बड़ा आर्थिक व सुरक्षा सहयोग समझौता कर लिया जो ऊर्जा तथा दूसरे क्षेत्रों में चीन के कई अरब डालर के निवेश का मार्ग साफ़ करेगा और इसके साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वजह से अलग थलग करने की अमरीका की कोशिशों पर पानी फिर जाएगा।

18 पृष्ठों में इस समझौते की कुछ जानकारियां हैं जो न्यूयार्क टाइम्ज़ ने हासिल की हैं जिनके अनुसार ईरान के बैंकिंग, टेलीकम्युनिकेशन, पोर्ट्स, रेलवे और दूसरे दर्जनों प्रोजेक्ट्स में चीन व्यापक सहयोग करेगा। इसके बदले चीन को ईरान से बहुत किफ़ायती दामों में अगले 25 साल तक तेल मिलता रहेगा।

इस दस्तावेज़ में यह भी बताया गया है कि दोनों देशों के बीच सामरिक सहयोग में भी विस्तार होगा और यह इस इलाक़े में अमरीका की कई दशकों से जारी उपस्थिति को समाप्त करने की प्रक्रिया की शुरुआत साबित होगा। समझौते के तहत दोनों देश संयुक्त रूप से सैन्य अभ्यास और ट्रेनिंग के कार्यक्रम आयोजित करेंगे, हथियार बनाएंगे और इंटेलीजेन्स जानकारियों की लेनदेन करेंगे जिसकी मदद से आतंकवाद, मादक पदार्थों और इंसानों की तस्करी को रोका जाएगा।

इस साझेदारी का प्रस्ताव 2016 में अपने ईरान दौरे में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दिया जिसे हाल ही में राष्ट्रपति रूहानी के मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दी है।

बीजिंग में अधिकारियों ने इस समझौते के बारे में ज़्यादा ब्योरा देने से इंकार किया है। यह तय है कि ईरान और चीन का समझौता चीन अमरीका तनाव को एक अलग रूप देगा। यह ईरान के बारे में ट्रम्प की आक्रामक नीतियों का करारा जवाब है।

इस समय अमरीका मंदी की भयानक चपेट में है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत तेज़ी से अलग थलग भी पड़ता जा रहा है और चीन को अमरीका की इस हालत का बहुत अच्छी तरह एहसास है। ईरान के साथ किए गए समझौते से ज़ाहिर है कि चीन को विश्वास है कि ईरान के साथ सहयोग की स्थिति में अमरीका की ओर से जो प्रतिबंध लगाए जाएंगे वह चीन का कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे।

आने वाले 25 वर्षों में चीन कुल 400 अरब डालर का निवेश करेगा इसका मतलब यह है कि चीन ने अच्छी तरह समझ लिया है कि अमरीका की ओर से लगाए जाने वाले प्रतिबंधों से निपटने के लिए उसने जो उपाय सोचे हैं वह सफल रहेंगे।

 

चीन ईरान में लगभग 100 परियोजनाओं में निवेश करेगा जिससे करोड़ो ईरानियों के जीवन में आसानियां पैदा होंगी क्योंकि इन परियोजनाओं में एयरपोर्ट्स, हाई स्पीड रेलवे और सब-वे शामिल हैं। चीन पश्चिमोत्तरी ईरान के माकू इलाक़े में फ़्री ट्रेड ज़ोन डेवलप करेगा इसी तरह आबादान और क़िश्म में भी फ़्री ट्रेड ज़ोन का निर्माण किया जाएगा।

चीन को 5जी टेलीकम्युनिकेशन के लिए इंफ़्रास्ट्रक्चर के निर्माण का भी न्योता दिया गया है। इससे साइबर स्पेस में होने वाली गतिविधियों पर ईरान के अधिकारी बेहतर अंदाज़ में नज़र रख सकेंगे।

चीन जिस गति से ईरान में निवेश करने जा रहा है उससे साफ़ हो गया है कि अब बीजिंग सरकार का संयम समाप्त हो चुका है और वह अमरीका के प्रतिबंधों पर अब और अमल नहीं कर सकती।

 

ईरान भी पश्चिमी देशों विशेष रूप से यूरोप से व्यापक रूप से व्यापार करता रहा है लेकिन जब यह व्यापार कठिन हो गया तो ईरान ने भी अपना रास्ता तलाश कर लिया है।

बीजिंग में युनिवर्सिटी आफ़ साइंस एंड टेक्नालोजी में ईरानी ऊर्जा रिसर्चर अली क़ुलीज़ादे का कहना है कि ईरान और चीन इस समझौते को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के रूप में देखते हैं जिसका मक़सद आपसी हितों को विस्तार देने के साथ ही अमरीका को भी टक्कर देना है।

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