Jul १४, २०२० १५:२४ Asia/Kolkata
  • भारत, ईरान के साथ दोस्ती में भी चीन से पिछड़ता जा रहा है, चाबहार-ज़ाहेदान रेल प्रोजेक्ट से हुआ बाहर

ईरान और भारत ने चार साल पहले चाबहार से ज़ाहेदान के लिए रेलवे लाइन बिछाने के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन अब ईरान ने अकेले ही इस योजना को आगे बढ़ाने का फ़ैसला किया है।

भारत के अंग्रेज़ी भाषा के अख़बार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़, मोदी सरकार के ढुलमुल रवैये को देखकर, ईरान ने चाबहार रेल प्रोजेक्ट से भारत को अलग कर दिया है।

पिछले ही हफ़्ते ईरान के परिवहन और शहरी विकास मंत्री मोहम्मद इस्लामी ने 628 किलोमीटर रेलवे ट्रैक बिछाने की परियोजना का उद्घाटन किया, जिसे अफ़ग़ानिस्तन की सीमा पर ज़रंज तक बढ़ाया जाएगा।

तेहरान का यह क़दम नई दिल्ली के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। ख़ास तौर से ऐसे समय में जब भारत और चीन के बीच तनाव जारी है और ईरान और चीन 25 वर्षीय रणनीतिक साझेदारी का समझौता करने जा रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि भारत द्वारा प्रोजेक्ट के लिए ज़रूरी फ़ंड उपलब्ध कराने में आनाकानी के चलते ईरान ने इस योजना को ख़ुद ही आगे बढ़ाने का फ़ैसला लिया है।

यह बड़ी परियोजना 2022 तक पूरी हो जाएगी, जिसके लिए ईरान नेशनल डेवलपमेंट फ़ंड क़रीब 40 करोड़ डॉलर का निवेश करेगा।

भारत न केवल पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाने और सहयोग में विस्तार करने में चीन से पिछड़ता जा रहा है, बल्कि ईरान जैसे पारम्परिक दोस्त देशों में भी कहीं पीछे छूटता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए मोदी सरकार की विदेश नीति ज़िम्मेदार है। क्योंकि मोदी सरकार अमरीका और इस्राईल से सहयोग बढ़ाने के चक्कर में एक एक करके अपने पारम्परिक सहयोगियों को खोती जा रही है।

अफ़ग़ानिस्तान एक ऐसा देश है, जिसकी सीमा समुद्री मार्ग से नहीं मिलती है, और वहां भारत ने भारी निवेश कर रखा है। अफ़ग़ानिस्तान तक पहुंच बनाने में सहूलत के लिए भारत ने ईरान की चाबहार बंदरगाह को विकसित करने और चाबहार से अफ़ग़ानिस्तान सीमा के निकट ज़ाहोदान तक रेलवे लाइन बिछाने की योजना में सहयोग का समझौता किया था।

चाबहार बंदरगाह के ज़रिए भारत, पाकिस्तान को बाइपास करके समुद्री मार्ग से अपने उत्पाद अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक पहुंचा सकता है।

सूत्रों का कहना है कि चाबहार बंदरगाह को अमरीकी प्रतिबंधों से छूट मिलने के बावजूद, भारत इस योजना को पूरा करने में भी ढिलाई से काम ले रहा है।

चाबहार-ज़ाहोदान रेलवे परियोजना, ईरानी रेलवे और भारतीय रेलवे कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के बीच, भारत, ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता था, जिसके लिए नई दिल्ली ने अपनी प्रतिबद्धता जताई थी।

मई 2016 में, भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने जब चाबहार समझौते पर हस्ताक्षर के लिए तेहरान की यात्रा की थी, उसी दौरान भारतीय रेलवे ने ईरानी रेल मंत्रालय के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। msm

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