Aug ०४, २०२० १८:०६ Asia/Kolkata
  • जनरल सुलैमानी का बदला, हमारी महत्वकांक्षा, हम उसी की ओर बढ़ रहे हैं, जनरल सलामी का बड़ा एलान!

ईरान के इस्लामी क्रांति संरक्षक बल आईआरजीसी के कमांडर जनरल सलामी ने कहा है कि शहीद सुलैमानी के खून का बदला, हमारी महत्वकांक्षा बन चुका है और हम उसी दिशा में क़दम बढ़ा रहे हैं।

आईआरजीसी के प्रमुख जनरल सलामी ने शहीद क़ासिम सुलैमानी की जीवनी, दाइश के अंत और प्रतिरोध मोर्चे की शक्ति की प्रदर्शनी के उदघाटन के अवसर पर अपने एक भाषण में कहा कि हमारे दुश्मनों की एक गलती यह है कि वह यह समझते हैं कि बड़े लोगों की हत्या से हमारी क्रांति ठहर जाएगी लेकिन पिछले 40 वर्षों की सच्चाई से यह साबित हो चुका है कि शहादत से प्रतिरोध के मोर्चे में नयी जान पड़ जाती है। उन्होंने ने कहा कि यह सिद्धान्त, कभी न भुलाए जाने वाले शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी के बारे में भी जारी है और शहादत जितनी बड़ी होती है, समाज में आंदोलन, शहादत और जेहाद की भावना उतना ही अधिक मज़बूत होती है और आज हम देख रहे हैं कि प्रतिरोध की मशाल, यथावत जनरल सुलैमानी के हाथों में है, उनका हाथ में पताका लहरा रही है, प्रतिरोध का झंडा लहरा रहा है और उन्होंने ने मार्ग शुरु किया था आज उस पर लोग अधिक तेज़ी से चल रहे हैं यहां तक कि अब शहीद सुलैमानी के खून का बदला, एक महत्वकांक्षा में बदल चुका है।

अमरीका ने जनरल सुलैमानी और अबू मेहदी अलमुहंदिस को एक ड्रोन हमले में शहीद कर दिया था

 

जनरल सलामी ने कहा कि हम इसी महत्वकांक्षा के साथ जी रहे हैं और निश्चित रूप से न केवल यह कि हम उनका बदला लेकर रहेंगे बल्कि जिस रास्ते पर कुछ दूर तक वह चले थे उस पर अंत तक चलकर बैतुलमुक़द्दस को आज़ाद कराएंगे और इस्लामी क्षेत्रों से इस्लाम के दुश्मनों को खदेड़ कर दम लेंगे। इस राह में कोई ठहराव नहीं होगा इस राह पर आगे बढ़ते रहेंगे और शहादत हमारी इच्छा और हमारे  लिए गर्व है।

इस उद्धाटन समारोह में ईरान के चीफ आफ आर्मी स्टाफ जनरल बाकेरी ने अपने भाषण में कहा कि प्रदर्शन से पता चलता है कि किस तरह से मानवता  व इस्लाम के दुश्मन आतंकवादियों ने इलाक़े की राष्ट्रों को खतरे में डाला और पवित्र स्थलों को तबाह करना चाहा।

जनरल बाक़ेरी ने कहा कि अगर शहीद सुलैमानी, उनके साथी और सलाहकार जनरलों ने भूमिका न निभाई होती और इन कमांडरों ने सीरिया और इराक़ की सरकार और जनता के साथ सहयोग न किया होता और अगर वरिष्ठ धर्म गुरु का फतवा न होता तो इन देशों की सत्ता पर आज दाइश का क़ब्ज़ा होता। Q.A

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